नई शिक्षा पॉलिसी की Top 10 बातें जानिए आपके बच्चों पर क्या होगा असर?
मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी तो दे दी है। अब लोग सीधे और सरल भाषा में समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल के मुताबिक नई पॉलिसी बनाने से पहले व्यापक विचार विमर्श किया गया। माना जाता है कि करीब दो लाख लोगों के सुझाव लिए गए। 34 साल बाद भारत में शिक्षा का नया पैटर्न आया है। पंचायत से लेकर देश के शीर्ष स्तर पर काफी मंथन के बाद ही नई नीति को मंजूरी दी गई है। नई नीति के अहम प्वाइंट्स हम यहां शेयर कर रहे हैं।
1) शिक्षकों के लिए पेशेवर मानक: शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों (एनपीएसटी) का एक सामान्य मार्गदर्शक सेट है जो 2022 तक राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा विकसित किया जाएगा।
2) संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को अहमियत: केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को मंजूर की गई नई शिक्षा नीति (NEP) में संस्कृत और बाकी भारतीय भाषाओं को अहमियत दी गई है। भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान (IITI) की स्थापना की बात कही गई है।
3) नई शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा: नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मतलब मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे तमाम विधायों पर बेहतरत विकल्प सुझाए गए हैं।
4) सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए जीडीपी का 6% हिस्सा शिक्षा में लगाने का फैसला किया है। फिलहाल अभी GDP का 4.43% ही शिक्षा पर खर्च किया जाता है।
5) अमेरिका की तर्ज पर NRF यानि नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का गठन किया जाएगा। जिसका मूल मकसद देश में शोध को प्रोत्साहित करना है।
6) स्कूल से लेकर कॉलेज तक 5+3+3+4 पैटर्न: 3 से 18 साल के छात्रों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन फार्मेट तय किया गया है। शुरुआती स्टेज की पढ़ाई का 5 साल का प्रोग्राम सेट किया गया है। जिसमें 3 साल प्री-प्राइमरी और क्लास-1 और 2 को जोड़ा गया है। इसके बाद क्लास-3, 4 और 5 को दूसरे स्टेज में रखा गया। फिर क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के तीसरे सेट में रखा गया है। आखिर क्लास-9, 10, 11, 12 को हाई स्टेज में रखा गया है।
7) नई शिक्षा नीति के तहत कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के और प्रसार पर जोर दिया गया है। साथ ही बालिका शिक्षा को लेकर सरकारों ने संवेदनशील रुख अख्तियार करने का फैसला किया है।
8) कॉमन एंट्रेंस एग्जाम: उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए अब छात्रों को माथा पच्ची नहीं करनी होगी। एक ही कॉमन एंट्रेंस होगा इसके बाद छात्रों को प्रवेश मिल जाएगा।
9) मल्टिपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम: अगर आप लंबी अवधि का कोर्स कर रहे हैं और बीच में ही मन ऊब जाय तो आप बीच में ही कोर्स को छोड़ सकते हैं। बीटेक जैसे कोर्सेस में भी ये सुविधा उपलब्ध होगी। अच्छी बात ये कि बिना M.Phil के सीधा PhD करने की अब छूट होगी।
पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री मिलेगी। 4साल का डिग्री प्रोग्राम फिर M.A. और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD में दाखिला ले सकते हैं।
10) बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाया जाएगा: बोर्ड परीक्षाओं का दबाव अब छात्रों के चहरे पर नजर नहीं आएगा। एनईपी के मुताबिक ग्रेड 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षाएं जारी रहेंगी। नए राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र बनाने का भी प्रस्ताव है।