काव्य संसद में 10वें व्याकरण शाला का हुआ आयोजन
काव्य संसद, छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों द्वारा 10वे व्याकरण शाला का आयोजन रविवार को किया गया। जिसमें आलोचना एक परिचय एवं इतिहास विषय पर व्याख्यान दिया गया। काव्य संसद संस्थापक पुखराज प्राज ने बताया कि हर्ष का विषय है कि व्याकरण शाला में गद्य की विधाओं पर आधारित व्याकरण शाला का आयोजन हम प्रत्येक रविवार को करते है। व्याकरण शाला का मूल उद्देश्य में समूह के समस्त साहित्यकारों के बीच गद्य एवं पद्य दोनो के विभिन्न विधाओं के बारे में जानकारी उसके उद्भव एवं सृजन के लिए आवश्यक शर्तों पर हम सभी चर्चा परिचर्चा आयोजित करते हैं। जो साहित्य के उत्थान के लिए आवश्यक है।
10वें व्याकरण शाला के आलोचना के संदर्भ में परिचय एवं परिभाषा समूह के मध्य महासमुन्द जिले से युवा कलमकार विनोद कुमार जोगी ने रखा । आलोचना के प्रकारों के बारे में समूह के मध्य जानकारियाँ कांकेर से वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री नलिनी बाजपेयी ने रखा। रायगढ़ से युवा हस्ताक्षर कवयित्री पुष्पा पटनायक ने हिन्दी आलोचना के विकास क्रम के संदर्भ में जानकारी दी। वहीं काव्य संसद के संस्थापक पुखराज प्राज ने अच्छे आलोचक के लिए आवश्यक गुण एवं सफल आलोचना के गुर समूह के मध्य रखा।
काव्य संसद उपाध्यक्ष डिग्री लाल जगत निर्भीक ने बताया कि व्याकरण शाला का यह प्रयास हमने जो 3 माह पूर्व प्रारंभ किया था। वह समूह से जूड़े समस्त साहित्यकारों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। एक ही मंच पर साहित्यकारों द्वारा विभिन्न विधाओं के विषय में जानकारी आदान-प्रदान से विविध विषयों में लेखन के लिए हम सीख रहे हैं। काव्य संसद सह संस्थापक सुन्दर लाल डडसेना मधुर ने बताया की काव्य संसद के द्वारा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता के प्रयास किये जा रहे हैं। आगामी समय में भी विभिन्न कार्यक्रम समूह में आयोजित होगें और साहित्य के उत्थान के लिए हम सभी कटिबद्ध रहेंगे। इस वर्चुअल व्याकरण के कार्यक्रम में रायगढ़ से डिग्री लाल जगत निर्भीक, गुलशन खम्हारी, उर्मिला सिदार, बिलासपुर से सावित्री यादव, बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार, दुर्ग से प्रिया गुप्ता,महासमुन्द से सुन्दर लाल डडसेना,राजनांदगांव से पदमा साहू, जांजगीर से गिरधारी लाल चौहान, कांकेर से मीरा आर्ची चौहान सहित अन्य जिलों से साहित्यकारों की वर्चुअल पटल में उपस्थिति रही।