मुख्यमंत्री ने कांकेर के कुलगांव में गांधीग्राम का किया भूमिपूजन
महात्मा गांधी के गांधी ग्राम की संकल्पना को
मूर्तरूप देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज आदिवासी अंचल
उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतर्गत जंगल के मध्य में स्थित एक छोटे से
गांव कुलगांव में गांधीग्राम का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री बघेल
द्वारा आज यहां निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वीडियो
कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों में आयोजित सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण
अधिकार पत्र वितरण समारोह में 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लगभग 1300
सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण अधिकार पत्रों का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कांकेर जिले के अंतर्गत इच्छापुर में हर्रा
प्रसंस्करण केन्द्र का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने की।
उल्लेखनीय है कि उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कुलगांव में स्थापित किए
जा रहे गांधीग्राम की स्थापना जिला प्रशासन और वन मण्डल द्वारा संयुक्त रूप
से की जा रही है। गांधीग्राम की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीण
विकास एवं कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्व-रोजगार से जोड़ना है।
कुलगांव में स्थापित किए जा रहे गांधीग्राम में उत्तर बस्तर कांकेर के
साथ-साथ राज्य के सभी जिलों के युवा कौशल विकास संबंधी प्रशिक्षण ले
सकेंगे। गांधीग्राम की स्थापना स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से ग्रामीण
परिवेश को ध्यान में रखते हुए की जाएगी। प्रशिक्षण केन्द्र में एक
प्रशिक्षण कक्ष और 100 प्रशिक्षणार्थियों के ठहरने की व्यवस्था होगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सामुदायिक पट्टेधारियों को बधाई और
शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पट्टा मिलने के बाद महात्मा गांधी की परिकल्पना
को धरातल पर उतारकर देश-दुनिया को दिखाना है कि वन अधिकार पट्टे से
ग्रामीणों को समग्र रूप से रोजगार मिल रहा है और उनके आय के साधन बढ़ने से
स्वावलंबी बनने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार के वितरण से
जंगल के वनवासियों को उनका अधिकार मिल रहा है। इससे वनों का संरक्षण, विकास
और ग्रामीणों के आजीविका के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध होंगे। वर्ष भर
काम मिलने से वनों पर निर्भर रहने वाले आदिवासियों को काम की तलाश में
पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक पट्टा वितरण के बाद जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित गांव के लोगों को यह जानकारी दे कि किस गांव में कितने क्षेत्रफल का कितना पट्टा दिया गया। इसके साथ ही हर गांव में वहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाए। कार्ययोजना इस प्रकार तैयार की जाए कि वनवासियों को सालभर रोजगार उपलब्ध हो।
इसके सफल
क्रियान्वयन के लिए राजस्व, वन, कृषि तथा उद्यानिकी सहित मनरेगा योजना और
अन्य विभागों का सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र में
विशेष वनोपज का उत्पादन होगा। वहां उसकी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की
कार्ययोजना भी बनाई जाए। इससे वनावासियों की सतत रूप से आमदनी भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामुदायिक अधिकार के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन का संरक्षण, पुनर्जीवन एवं प्रबंधन कार्य भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जन सुविधा जैसे- विद्यालय, औषधालय, आंगनबाड़ी, उचित मूल्य की दुकान, विद्युत एवं दूर संचार लाइन, टंकियां एवं लघु जलाशय, पेयजल की आपूर्ति एवं जल पाईप लाइन, जल या वर्षा जल, संचयन की संरचनाएं, लघु सिंचाई नहर, आपारंपरिक ऊर्जा स्त्र्रोत, कौशल उन्नयन या व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, सड़के एवं सामुदायिक केन्द्रों सहित के कार्य विभागों को प्रदाय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों को सम्मान के जीवन के साथ-साथ
अतिरिक्त आय के संसाधन उपलब्ध कराने के लिए फलदार, लघु वनोपज एवं औषधी
रोपण, सब्जी उत्पादों आदि लाभदायक फसलों को लगाया जाए। इससे जंगल कटने से
बचेंगे और यहां के वनवासी जंगलों का संरक्षण भी करेंगे। मुख्यमंत्री ने
विशेषकर फलदार तथा लघु वनोपज पर आधारित पौधे जैसे- ईमली, आम, हर्रा, बहेड़ा,
आंवला आदि वनोपज के रोपण पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिलों में
उपस्थित वन अधिकार समितियों के पदाधिकारियों से चर्चा भी की और उन्हें
सामुदायिक वन अधिकार संरक्षण पत्र के तहत प्रदाय भूमि का स्वरोजगार के लिए
अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री बघेल ने इंदिरा वन
मितान समूह के गठन करने के लिए जोर दिया।
इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में
सरकार द्वारा वनों के संरक्षण तथा संवर्धन सहित वनवासियों के हित के लिए
लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आज महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर राज्य
में वनवासियों की उन्नति के लिए बड़ी तादाद में व्यक्तिगत के साथ-साथ
सामुदायिक वन संरक्षण अधिकार पत्र का भी वितरण किया जा रहा है।
उल्लेखनीय
है कि देश में चालू वर्ष में अब तक लघु वनोपजों के संग्रहण में छत्तीसगढ़
शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। छत्तीसगढ़ में देश के लगभग 124 करोड़ रूपए की
राशि के 74 प्रतिशत लघु वनोपजों का संग्रहण हुआ है। उन्होंने बताया कि
प्रदेश में वनवासियों के हित के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण के साथ-साथ
उसके प्रसंस्करण कार्य पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। यहां लघु वनोपजों
की खरीदी का दायरा को निरंतर बढ़ाते हुए अब 31 तक कर दिया गया है। इसी तरह
तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में अनेक योजनाएं चलाई जा रही है।
इनमें हाल
ही में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए स्वर्गीय शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम
से तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना भी चलाई जा रही है। अनुसूचित
जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि वन
संसाधन के अधिकार के लिए मुख्यमंत्री ने प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया
है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक रूप से वनों का उपयोग भी आने वाले पीढ़ी कर
सके इसलिए बेहतर क्रियान्वयन जरूरी है। डॉ. टेकाम ने कहा कि वन अधिकार
समिति नजरी नक्शा बनाये और वन अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुरूप बेहतर
कार्ययोजना तैयार की जाए।
इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र
चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, खाद्य एवं नागरिक
आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक मोहन मरकाम, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमलसिंह परदेशी, सचिव आदिम जाति कल्याण डी.डी. सिंह,
प्रधान मुख्य वनसंरक्षक राकेश चतुर्वेदी, मुख्यमंत्री के सलाहकार
राजेश तिवारी, विनोद वर्मा और रूचिर गर्ग उपस्थित थे।