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उत्तर बस्तर कांकेर : खैरखेड़ा में समाज प्रमुखों द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संबंध में किया गया परिचर्चा

चारामा विकासखण्ड के ग्राम खैरखेड़ा में समाज प्रमुखों द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार परिचर्चा में छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष मनोज सिंह मण्डावी की अध्यक्ष्यता में आयोजित किया गया।

उन्होंने ग्राम खैरखेड़ा के गौठान में ग्रामीणों द्वारा किये जा रहे पारंपरिक रूप से बकरी पालन व मुर्गी पालन कार्य का भी अवलोकन किया। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार एवं वनों के सीमांकन संबंधी परिचर्चा में विधायक एवं संसदीय सचिव  शिशुपाल शोरी, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, जिला पंचायत के अध्यक्ष  हेमंत कुमार धु्रव, कलेक्टर के.एल. चौहान सहित जिले के समाज प्रमुख उपस्थित थे।

विधायक एवं संसदीय सचिव शिशुपाल शोरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज प्रमुखों से कहा कि परंपरा को बनाये रखने के लिए वनों की रक्षा कर फलदार पौधे लगाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें, जिससे वनों से मिलने वाली वनोपज का सदुपयोग ग्रामीणजन कर सकें।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष  मनोज सिंह मण्डावी ने खैरखेड़ा में आयोजित सामुदायिक वन संसाधन अधिकार एवं वनों की सीमांकन विवाद निराकरण संबंधी परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि विवादों को ग्रामसभा के माध्यम से वन एवं राजस्व विभाग और ग्राम प्रमुखों की उपस्थिति में बैठक आयोजित कर सुलझाने की आवश्यकता है,

जिससे विवादों का निराकरण आसानी से हल होगा और आपसी सामंजस्व बनी रहेगी। वन अधिकार के तहत् व्यक्तिगत, सामुदायिक और वन संसाधन अधिकार शासन द्वारा मान्यता पत्र के रूप में दी जा रही है, जिसका परीक्षण उपरांत पट्टा का वितरण निरंतर किया जा रहा है, जो प्रदेश में कांकेर जिला अग्रणी है। 

मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी ने खैरखेड़ा में आयोजित सामुदायिक वन संसाधन परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि वन मण्डल कांकेर द्वारा ग्राम कुलगांव में स्थापित किये जा रहे ‘‘गांधी ग्राम’’ में कौशल उन्नयन प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण किया जा रहा है,

जिसमें प्रशिक्षण कक्ष, रसोई घर और डायनिंग व्यवस्था सहित 100 प्रशिक्षुओं के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन वन प्रबंधन समिति कुलगांव के इन्दिरा वन मितान स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाएगा। इस प्रशिक्षण केन्द्र में प्रमुख रूप से वनोपज प्रसंस्करण (लाख प्रसंस्करण, हर्रा प्रसंस्करण, इमली प्रसंस्करण), लाख उत्पादन, शहद उत्पादन के लिए आधुनिक विधि, औषधीय पौधां की खेती बांस आधारित उत्पाद निर्माण, जैविक खाद का निर्माण, नर्सरी कार्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने वनोपज से होने वाली आय के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि वनों की सुरक्षा करें, फलदार पौधे लगायें, जिससे होने वाली आमदनी ग्रामीणों को मिलने लगेगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर 31 प्रकार के वनोपज का खरीदी करने का निर्णय लिया गया है।

सामुदायिक वन अधिकार और वनों सीमांकन परिचर्चा में जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री हेमंत कुमार धु्रव एवं कलेक्टर श्री के.एल. चौहान और डीएफओ कांकेर अरविंद पीएम ने भी संबोधित किया।

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