किसानों में रोष, बीज उत्पादक किसानों की करीब डेढ़ करोड़ रूपए की राशि अटकी
सरायपाली क्षेत्र के बीज उत्पादक किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। समर्थन मूल्य एवं 25 सौ रुपए की अंतर की राशि नहीं मिलने से इन किसानों में रोष व्याप्त है। सहकारी समिति के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले सामान्य किसानों को बोनस राशि की तीन किस्त मिल चुकी है मगर बीज उत्पादक किसानों को अंतर की राशि नहीं मिल पाई है। ऐसे में बीज उत्पादक किसान धान को बीज निगम को देने की बजाय समितियों को समर्थन मूल्य पर बेचना लाभप्रद मान रहे हैं। पूर्व मंडी अध्यक्ष भवानी शंकर चौधरी ने शासन से बीज उत्पादक किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना के तहत मिलने वाली राशि को शीघ्र प्रदान करने की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम प्रक्रिया केंद्र सरायपाली के अंतर्गत करीब 210 कृषक जुड़े है। इन किसानों द्वारा करीब 22285 क्विंटल बीज उपार्जित कर बीज प्रक्रिया केंद्र को प्रदान किया गया है। किसानों को समर्थन मूल्य एवं प्रोत्साहन की राशि मिल चुकी है मगर समर्थन मूल्य एवं 25 सौ रुपए के अंतर की राशि का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। बीज उत्पादक किसानों का करीब डेढ़ करोड़ रूपए की राशि अटकी हुई है। सहकारी समितियों में धान विक्रय करने वाले किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना के तहत 685 रुपये बोनस के रूप में प्रदान की जा रही है।
अब तक किसानों को इस योजना के तहत तीन किस्त प्राप्त हो चुकी है। अब बीज
उत्पादक किसानों की क्या अपराध है कि जो राजीव गांधी न्याय योजना से वंचित
किया जा रहा है। सरकार की यही नीति रही है तो बीज उत्पादक किसान हतोत्साहित
होंगे। आने वाले समय में बीज निगम को बीज प्रक्रिया केंद्र संचालित करने
में परेशानी होगी। ग्राम बोंदा के प्रकाश चंद्र पटेल ने बताया कि अभी तक
उन्हें राजीव गांधी न्याय योजना की एक किस्त भी नहीं मिल पाई है। उनके
द्वारा उत्पादित बीज यदि 25 सौ रुपये से कम में बिके तो फिर बीज निगम के
पास धान बेचने का झंझट क्यों पालेंगे। एक किसान ने बताया कि धान बीज तैयार
करने के लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च और मेहनत करनी पड़ती है।
उसके बाद भी बीज
निगम के अधिकारियों की नखरे बहुत होते हैं। बड़ी मुश्किल से किसान बीज
पैदा कर पाते हैं। ग्राम अन्तरझोला के कृषक भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि
उनके द्वारा करीब 4 हेक्टेयर में धान बीज उपार्जित किया है। शत्रुघ्न भोई
ने बताया कि उसने 2 हेक्टेयर में धान बीज का उत्पादन कर बीज निगम को प्रदान
किया है। बीज उत्पादक किसान बोनस राशि की मांग को लेकर कई बार बीज निगम
एवं शासन प्रशासन से मांग की गई मगर शासन स्तर पर कोई ध्यान नहीं दिए जाने
से किसानों में आक्रोश पनपने लगा है।