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कर वसूली में फिसड्डी साबित हो रही नगर पालिका सरायपाली, आर्थिक स्थिति होती जा रही खराब, अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा बरती जा रही कोताही

नगर पालिका सरायपाली कर वसूली में फिसड्डी साबित हो रही है। समय पर कर वसूली नहीं होने से नगरपालिका की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। समय रहते अगर कर वसूली पर ध्यान नहीं दिया गया तो नगर व्यवस्था पटरी से उतर सकती है। यहां तक कि बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन भुगतान एवं पेयजल आपूर्ति सहित अनेक कार्य बाधित हो सकते हैं। यह ज्ञातव्य हो कि नगरपालिका को सर्वाधिक आय संपत्ति कर, जलकर एवं समेकित कर से प्राप्त होती है मगर इन्ही कर की वसूली में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा कोताही बरती जा रही है। यदि लापरवाह कर्मचारियों पर समय रहते नकेल नहीं कसा गया तो नगरपालिका की माली हालत बदत्तर हो सकती है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका की संपत्ति कर, जलकर एवं समेकित कर की राशि एक करोड़ 68 लाख 66 हजार रुपए बकाया है। जिनमें से मात्र 24.09 लाख रुपए की वसूली हो पाई है। जो कुल बकाया राशि का मात्र 14 प्रतिशत है। वसूली मामले में सर्वाधिक बुरा हाल समेकित कर का है सनहाल मांग और बकाया मांग को मिलाकर कुल 57.21 लाख वसूली किया जाना है मगर अब तक मात्र 5.13 लाख रुपये की वसूली हो पाई है।

पालिका क्षेत्र अंतर्गत 1908 गरीब परिवारों को भागीरथी नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसी तरह गैर संपत्ति कर दाताओं के घरों में 282 एवं संपत्ति करदाताओं के घरों में 822 कुल 3012 नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। नगरपालिका के नागरिकों द्वारा नल जल का उपयोग तो भरपूर मात्रा में कर रहे हैं। मगर जलकर भुगतान में घोर लापरवाही बरती जा रही है। जिसके चलते बकायेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। 

बकाया मांग 26 लाख 23 हजार एवं सनहाल मांग 28 लाख 80 हजार रुपए हैं जिसके मुकाबले वसूली क्रमशः 1.68 एवं 6.68 लाख रुपए हुई है। इस तरह नगर पालिका क्षेत्र में करदाताओं की संख्या 5330 है जिनमें आवासीय 4800 एवं व्यावसायिक 530 है। इनसे भी करीब सनहाल मांग के रूप में 36.97 लाख एवं बकाया मांग 19.45 है। जिनके विरुद्ध वसूली क्रमशः 6.57 लाख एवं 4.04 लाख ही हो पाई है। समेकित कर के रूप में सनहाल मांग 23.84 लाख एवं बकाया मांग 33.47 लाख और वसूली हुई है मात्र 2.85 लाख एवं 2.28 रुपये। इतने कम मात्रा में करों की वसूली होगी तो नगरपालिका का खर्चा चलना भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए नगर पालिका प्रशासन समय रहते नहीं जागा तो पालिका गर्त में चला जाएगा।

पालिका क्षेत्र में सम्पत्ति कर पटाने वाले एक ही परिसर में निवासरत 4 परिवार को पालिका प्रशासन द्वारा अलग-अलग रूप से स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय, नल कनेक्शन और गरीबी रेखा के नीचे बनने वाले राशन कार्ड प्रदाय कर नियम विपरित उपकृत करने का कार्य किया गया है। पालिका प्रशासन में शामिल स्थानीय कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से पालिका की आय को नुकसान पंहुचाने के साथ ही शासन को भी चूना लगाने का कार्य किया गया है। इस बाबत स्थानीय वार्ड क्रमांक 6 पार्षद गुंजन अग्रवाल ने सक्रियता दिखाते हुए लिखित शिकायत के माध्यम से पालिका प्रशासन के नाक के नीचे जारी अनैतिक गतिविधियों को लेकर आवाज उठाई है। 

पार्षद अग्रवाल ने पालिका को दिए आवेदन में नगर के वार्ड क्रमांक 10 निवासी बजरंगलाल सेन, केसरीनंदन सेन सहित अन्य लोगो के विरूद्ध गलत जानकारी देकर पालिका से गरीबी रेखा के नीचे बनने वाले राशनकार्ड एवं नल कनेक्शन का लाभ लिए जाने पर संदेह व्यक्त करते हुए इसकी जांच व कार्रवाई की मांग की है। परंतु शिकायत के महिने भर बाद भी पालिका प्रशासन द्वारा पार्षद के आवेदन पर कोई कार्रवाई नही किए जाने की जानकारी देते हुए पार्षद गुंजन अग्रवाल ने बताया कि पालिका के कुछ कर्मचारी पालिका के प्रति निष्ठा का पालन नही कर रहे है। ऐसे कर्मचारी केवल पालिका के आय से अधिक स्वंय की आय की चिंता में मग्न है और शासन को चूना लगाकर नुकसान पंहुचा रहे है। 

पार्षद गुंजन अग्रवाल ने बताया कि एक परिसर के भीतर 3-4 परिवार निवासरत है। जिनमें से केवल एक ही व्यक्ति सम्पत्ति कर का भुगतान कर रहा है। बावजूद सभी को शौचालय और गरीबी रेखा के नीचे बनने वाले राशनकार्ड प्रदाय किया जाना न्याय संगत नही है। वहीं शासकीय व्यवसायिक परिसर में भी हजारो-लाखों रूपए देकर इनके द्वारा दुकाने आधिपत्य में ली गई है। ऐसे में इनके गरीबी रेखा के नीचे बनने वाले राशनकार्ड को कहां तक सही ठहराया जा सकेगा। वहीं नगर के मुख्य मार्ग पर आबादी भूमि में ज्योति फोटो स्टुडियों के नाम से बिना व्यवसायिक डायवर्सन के बेधड़क व्यवसायिक निर्माण किया गया है। जिसके लिए पालिका के कतिपय अधिकारी-कर्मचारियों ने बिना बैनामा रजिस्ट्री के उन्हें किस प्रकार व्यवसायिक निर्माण की अनुमति दी इस पर भी सूक्ष्मता से जांच किए जाने की मांग की है।

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