जशपुर : ओलावृष्टि से भारी मात्रा में फसल के नुकसान होने की संभावना
आज दो घंटे के मूसलाधार बारिश के बाद खुले मौसम ने ऐसी करवट ली कि शाम साढ़े चार बजे जमकर आंधी तूफान के साथ आधे घण्टे तक ओले गिरे. हालांकि ओले बहुत बड़े साईज के नही थे। लेकिन घंटो तक पुवाल के ढेरों में देखे गये। चमक गरज के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों के परिपक्व हो चुके धान की फसल को भारी नुकसान होने की बात कही जा रही है।
कोरोना काल में महीनों से अपने घरों में रहकर शासन के गाइडलाइन का पालन कर रहे किसानों को अपने उगाए सब्जी के साथ खेतों में गर्मी के दिनों में ले रहे धान की फसल की बर्बादी से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष भी किसानों को ओलावृष्टि से भारी नुकशान उठाना पड़ा था।
जिले भर में कोतबा क्षेत्र ही ऐसा है जहां वर्ष में दो बार धान का फसल बड़े पैमाने पर लिया जाता है। खमगड़ा जलाशय परियोजना से यहां गर्मी के दिनों में तीन हजार एकड़ से भी अधिक क्षेत्रों में धान का फसल लिया जाता है।वर्तमान स्थिति में आधे धान लगभग परिपक्व हो चुके है। उन खेतों के फसल काटने के लिये पानी निकासी की तैयारी में जुटे किसानों के धान नुकशान होना बताया जा रहा है।किसानों का कहना है कि तूफान के कारण खेतों में धान की फसल सो गए है उसके साथ ही परिपक्व हो चुके धान ओलावृष्टि से भारी मात्रा में झड़ने की संभावना है। इसके साथ ही पानी मे डूबे धान सड़ने की कगार पर है।