देश में बढ़ रहा ब्लैक फंगस का प्रकोप...ब्लैक और व्हाइट फंगस क... - CG Sandesh

देश में बढ़ रहा ब्लैक फंगस का प्रकोप...ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षणों में जानें अंतर...

देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों में ब्लैक फंगस यानी म्यूकोर्मिकोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच पिछले एक हफ्ते में कर्नाटक में 700 और हरियाणा में 400 मामले सामने आए हैं।म्यूकोर्मिकोसिस कवक यानी म्यूको के कारण होने वाला संक्रमण है। वातावरण में मौजूद ब्लैक फंगस के संपर्क में आने से लोग संक्रमित हो सकते हैं।

देश में दूसरी लहर की शुरुआत के बाद संक्रमितों की संख्या अचनाक से बढ़ गई। जिसके बाद लोग कोविड के इलाज के बाद इस ब्लैग फंगस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।

कर्नाटक में म्यूकोर्मिकोसिस के मामले

कर्नाटक सरकार ने रविवार को एक आदेश जारी कर सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों को म्यूकोर्मिकोसिस के लिए उपयुक्त उपचार प्रदान करने की अनुमति दी।

इस बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री सी एन अश्वथ नारायण ने बताया कि कर्नाटक में पिछले हफ्ते ब्लैक फंगस संक्रमण के लगभग 700 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों को इसका कारण पता लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। वहीं आशंका जताई जा रही है कि यह संक्रमण ऑक्सीजन की आपूर्ति, पाइपिंग की गुणवत्ता और उपयोग किए जाने वाले सिलेंडरों के कारण फैल रहा है।

नारायण ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि देश में एक साल पहले ब्लैक फंगस संक्रमण के लगभग 100 मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन राज्य ने पिछले सप्ताह में लगभग 700 मामले दर्ज किए हैं, यह वृद्धि चिंता का कारण बन रही है।

हरियाणा में ब्लैक फंगस संक्रमण

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि रविवार को ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले 421 हो गए हैं। जिनका इलाज अस्पतालों में चल रहा है। वहीं गुणगांव में लगभग 149 मामले दर्ज किए गए हैं जो कि सबसे अधिक हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से ब्लैक फंगस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरिसिन-बी के 12,000 इंजेक्शन की मांग की है। वर्तमान में मरीजों के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की 1,250 शीशियां उपलब्ध हैं।

ब्लैक फंगस के बीच व्हाइट फंगस के मामले भी बढ़ने लगे हैं. लेकिन अभी भी इसको लेकर उतनी ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है. जैसे कि अभी तक ये भी नहीं पता चल पाया है कि व्हाइट फंगस को कौन सी चीज ज्यादा खतरनाक बनाती है?

पटना के कंसल्टेंट एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉक्टर शरद बताते हैं कि "कई जगहों पर व्हाइट फंगस के मामले सामने आए हैं और ये शायद कैनडिडा (Candida) की बात कर रहे हैं. कैनडिडा पहले भी होता था. कैंसर, डायबिटीज की दवा लेने या स्टेरॉयड की वजह से जिनकी भी इम्युनिटी घटती है, ऐसे लोगों में फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है. व्हाइट फंगस का इलाज आसानी से हो जाता है. फिर भी लोगों को सजग रहने की जरूरत है."

क्या है ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस में अंतर?
अभी तक जो पता चला है उस हिसाब से ब्लैक फंगस कोरोना के उन मरीजों में पाया गया है जिनको बहुत ज्यादा स्टेरॉयड दिए गए, जबकि व्हाइट फंगस के केस उन मरीजों में भी संभव है जिन्हें कोरोना नहीं हुआ. ब्लैक फंगस आंख और ब्रेन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, जबकि व्हाइट फंगस आसानी से लंग्स, किडनी, आंत, पेट और नाखूनों को प्रभावित करता है.

इसके अलावा ब्लैक फंगस ज्यादा डेथ रेट के लिए जाना जाता है. इस बीमारी में डेथ रेट 50% के आसपास है. यानी हर दो में से एक व्यक्ति की जान जाने का खतरा है. लेकिन व्हाइट फंगस में डेथ रेट को लेकर अभी तक कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है.डॉक्टर कहते हैं कि व्हाइट फंगस एक आम फंगस है जो कोरोना महामारी से पहले भी लोगों को होता था. वाराणसी के विट्रो रेटिना सर्जन डॉ. क्षितिज आदित्य बताते हैं कि "ये कोई नई बीमारी नहीं है. क्योंकि जिन लोगों की इम्युनिटी बहुत ज्यादा कम होती है, उनमें ऐसी बीमारी हो सकती है. ब्लैक फंगस यानी म्युकरमाइकोसिस एक अलग प्रजाति का फंगस है, लेकिन ये भी ऐसे ही मरीजों को हो रहा है जिनकी इम्युनिटी कम है. ब्लैक फंगस नाक से शरीर में आता है और आंख और ब्रेन को प्रभावित कर रहा है. लेकिन व्हाइट फंगस यानी कैनडिडा अगर एक बार खून में आ जाए तो वो खून के जरिए ब्रेन, हार्ट, किडनी, हड्डियों समेत सभी अंगों में फैल सकता है. इसलिए ये काफी खतरनाक फंगस माना जाता है." एक्सपर्ट्स कहते हैं कि व्हाइट फंगस के केस में अच्छे स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लेकर इस बीमारी से ठीक हुआ जा सकता है. व्हाइट फंगस के अभी तक ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्लैक फंगस की तरह ही ये भी ज्यादा तेजी से फैल सकता है.


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