हाथी के हमले से 2 लोगों की मौत..शवों के पास ही डेरा जमाए हुए हैं हाथी
जानकारी के मुताबिक, जमुना गांव निवासी प्रकाश एक्का (55) की कंपार्टमेंट 862 में पट्टा जमीन है, जो कि जंगल के अंदर है। इस पर प्रकाश ने धान की बुआई की थी। वह सोमवार सुबह करीब 5.30 बजे फसल देखने गया था। वहां महुआ उठा रहा था, इसी दौरान हाथी ने हमला कर दिया। वहीं से करीब 500 मीटर दूर महिला दयामनी तिर्की (59) को भी हाथियों ने पटक कर मार डाला। हमले के बाद ग्रामीण डर गए हैं। वहां जिनकी फसलें लगी हैं, वह अब अंदर नहीं जा रहे हैं कि हाथी फिर हमला कर सकते हैं।
हमले के बाद हाथी घटना स्थल के पास ही मौजूद हैं। वह शवों के पास किसी को आने नहीं दे रहे हैं। फिलहाल वन विभाग की टीम शवों को निकालने का प्रयास कर रही है। DFO श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि अलग-अलग वन अमले की टीम पहुंच गई है। वह भी घटना स्थल के लिए रवाना हो गए हैं। कहा कि लोगों से अपील की जा रही है की जंगल में न जाएं। वहीं कलेक्टर महादेव कावरे ने मृतक ग्रामीणों के परिजनों को 6-6 लाख रुपए की सहायता राशि देने का निर्देश DFO को दिया है।
इससे पहले 7 जून को भी फुलडीह निवासी आगेश राम (21) को हाथियों ने मार दिया था। वह लकड़ियां लेने के लिए जंगल में गया था। दोपहर तक नहीं लौटा तो परिजन गांव वालों के साथ तलाश करने निकले। ग्रामीण ट्रैक्टर लेकर जंगल पहुंचे तो आगेश का शव दिखाई दिया। ग्रामीण उसे लेने के लिए बढ़े ही थे कि हाथियों की आवाज सुनाई देने लगी। इसे सुनकर ग्रामीण भाग निकले। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम अगले दिन हाथियों को भगाकर वहां से शव निकाल सकी थी।
जशपुर जिले में बीते कुछ समय से हाथियों का उत्पात बढ़ता ही जा रहा है। पिछले 16 माह में हाथियों के हमले में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इनसे बचने के लिए ग्रामीणों के लगाए करंट की चपेट में आने से साल भर के दौरान दो हाथी भी मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि पड़ोसी राज्य झारखंड और ओडिशा में खनन उद्योग के चलते उजड़ रहे जंगल के कारण हाथी छत्तीसगढ़ का रुख कर रहे हैं। भोजन को लेकर हो रही कमी के कारण उनमें द्वंद के भी मामले आए हैं। फिलहाल गांव में मुनादी कराई जा रही है।