सद्गुरु कबीर प्राकट्य दिवस समारोह में सम्मिलित होने घोयनबाहर... - CG Sandesh

सद्गुरु कबीर प्राकट्य दिवस समारोह में सम्मिलित होने घोयनबाहरा पहुंचे संसदीय सचिव।

भक्ति काल की संत परंपरा निर्गुण वाद के आधार स्तंभ सदगुरु कबीर दास जी के प्राकट्य उत्सव पर कार्यक्रम का आयोजन कोमाखान क्षेत्र के ग्राम घोयनाबाहरा में किया गया था। जिस में सम्मिलित होने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के संसदीय सचिव एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव घोयनाबाहरा पहुंचे।

उक्त कार्यक्रम में सम्मिलित होकर श्री यादव ने सर्वप्रथम संत गुरु कबीर दास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पूजा की फिर चौका आरती में सम्मिलित हुए। तत्पश्चात यादव के मुख्य आतिथ्य में मंचीय कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के जिलाध्यक्ष रेशम दास मानिकपुरी ने की।

वही विशेष अतिथि की आसंदी पर उड़ीसा के पूर्व प्रांतीयअध्यक्ष प्रेम दास मानिकपुरी, पूर्व मंडी अध्यक्ष तेजन चंद्राकर, बागबाहरा शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ठाकुर, बागबाहरा ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रवि निषाद, कोमाखान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संतोष पटेल, एल्डरमैन द्वय विष्णु महानंद सिकंदर ठाकुर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गणेश शर्मा विराजमान रहे।

कबीर का जीवन ही उनका संदेश।

प्राकट्य दिवस समारोह के उद्बोधन सत्र के दौरान मुख्य अतिथि की आसंदी से उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए श्री यादव ने कहा कि सदगुरु कबीर का जीवन स्वयं अपने आप में संदेश है फिर भी आज के इस कार्यक्रम में उनके द्वारा समाज को दिए गए जीवंत संदेशों विषय में कुछ कहने का प्रयास कर रहा हूं।

श्री यादव ने कहा कि आज जब हम चारो ओर व्याप्त सामाजिक जड़ता तथा अराजकता की ओर उन्मुख होते हैं तब व्यवस्था के विरुद्ध क्रांति का शंखनाद करने के लिए युगपुरुष की आवश्यकता महसूस करते हैं। कबीर का कालजयी व्यक्तित्व इस समय हमारे लिए ज्योतिपुंज है। आज से लगभग 600 वर्ष पूर्व 1397 ई. में काशी में जन्मे कबीर आजीवन अथक प्रयासों से समाज का मार्गदर्शन करते रहे। वे जुलाहा कर्म को अपनाकर ग्राहस्थ जीवन के साथ संत बनकर ‘समाज सुधार’ का कार्य भी करते रहे।

लोग दो प्रमुख जीवन शैली समुदाय के के अनुयायी जो कि कबीर के उलट बाँसियों के चलते जो जीवनभर उनके विरोधी थे उनकी मृत्युपरांत उनके पार्थिव शरीर को लेकर कबीर हमारे हैं कबीर हमारे हैं हम अपने अपने धर्म के के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करेंगे इस मुद्दे को लेकर आपस में उलझे। ऐसे थे हमारे बाबा कबीर। जो किसी धर्म विशेष के ना होकर पूरे विश्व के थे। और सदगुरुदेव कबीर की उलटबाँसिया आगे चलकर हिन्दू संतों, पीरों, फकीरों, ‘गुरुग्रंथसाहिब’ आदि की जुबान बनी । अर्थात् कबीर का सम्पूर्ण जीवन ही उनका संदेश है। और ऐसे निर्गुण बाद के आधार स्तंभ बाबा कबीर के चरणों में मैं शत-शत नमन करता हूं।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से समाज के सूअर माल क्षेत्र से अध्यक्ष खेम दास मानिकपुरी, लाल दास मानिकपुरी, संतोष दास मानिकपुरी, जीडी मानिकपुरी, भोला दास मानिकपुरी, गोपी दास मानिकपुरी , डालेश्वर दास ,प्रेमदास, कोमाखान ग्राम पंचायत के उपसरपंच शशि कला मानिकपुरी, बालमोतिन मानिकपुरी, आशा मानिकपुरी, भगवती मानिकपुरी, पूनम दास मानिकपुरी। तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता करतार नायक, कोमाखान युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रत्यूष प्रताप सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी कांति प्रसाद तिवारी, तूफान सिंह दीवान , गुलजार खान, खोमेश साहू, पोखन महानंद, अंजोर सिंह ठाकुर राहुल श्रीवास, शशांक श्रीवास के साथ-साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी जन व ग्रामीण तथा मानिकपुरी समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


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