करियर की शुरुआत में ही सीख लें चीजें.....प्रेशर हैंडल से लेकर लर्निंग और ग्रूमिंग तक
हर कोई चाहता है कि जल्द से जल्द पढ़ाई खत्म करके नौकरी करना शुरु कर सकें। इसके साथ ही पहली नौकरी भी इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। वह चाहे किसी भी नई जगह या कितनी भी बड़ी पोस्ट पर क्यों ना पहुंच जाएं, लेकिन पहली नौकरी को कभी भी नहीं भुला पाता। अपनी पहली जॉब में सीखी गई बातें व्यक्ति कभी नहीं भूल पाता । इसलिए अपने पहले जॉब में खुद को सीखने के लिए ओपन रखें। अगर आप भी कॉलेज खत्म करने के बाद जॉब कर रहे है तो आइए जानते है कुछ एेसी बातों के बारे में जो आपको पहली जॉब से सीख लेनी चाहिए
समय के पांबद बने
हर व्यक्ति के लिए समय कीमती होता है । एेसे में समय के महत्व के समझें।
अपनी प्रोफेशनल लाइफ में हमेशा समय का पाबंद होना चाहिए क्योंकि लेटलतीफी
का मतलब है आप अपनी कंपनी में खुद को लेकर गलत छाप छोड़ रहे हैं। अगर आप
समय पर ऑफिस आएंगे तो समय से निकल भी पाएंगे और इससे आपको अपने निजी जीवन
के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। समय की पाबंदी से मतलब डेडलाइन पूरा करना भी
हैं क्योंकि काम को डेडलाइन में पूरा करना एक अच्छे प्रोफेशनल करियर के
लिए जरूरी है।
करियर गोल सेट करें
इसकी प्लानिंग वैसे ही करें जैसे
फाइनेंशियल गोल बनाते हैं. आपको बहुत सावधानी से करियर गोल तय करने की
जरूरत है. एक स्टूडेंट के रूप में आप इस बारे में सोचना और रणनीति बनाना
शुरू करिये. छात्रों के बीच हालांकि करियर को लेकर विकल्प के बारे में
जागरूकता और सूचना कम होती है. माइंडलर डॉट कॉम के सीइओ और फाउंडर प्रतीक
भार्गव ने कहा, 'एक सर्वे के मुताबिक कम से कम 72 फीसदी स्टूडेंट करियर के
ऑप्शन के बारे कन्फ्यूज्ड हैं. 80 फीसदी से अधिक छात्र सिर्फ छह से आठ
करियर ऑप्शन के बारे में जानते हैं.'
प्रोफेशनल बनें
प्रोफेशनल एटिट्यूड व्यक्ति के करियर में बहुत महत्व भूमिका निभाता है । ये
चीज आपका करियर बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है। यह निर्भर करता है
कि आप खुद को पहले जॉब और आने वाले जॉब्स में किस तरह से ग्रूम करते हैं।
याद रखें कि ज्यादा सुनें और कम बोलें, ज्यादा से ज्यादा सीखें और बोलने
से पहले हमेशा सोचें।
मेल एटिकेट्स
करियर के शुरुआती दौर में आपने यह चीज सीख ली तो बहुत अच्छी बात होगी। आप
इस बात पर गौर करें कि आपके कलिग्स या सीनियर्स किस तरह मेल्स लिखते हैं,
किस तरह उचित अभिवादन के साथ मेल्स शुरू करते हैं और किस तरह वे
प्रतिक्रिया और प्रशंसा का प्रत्युत्तर देते हैं। प्रॉपर मेल एटिकेट्स
आपके कलिग्स और सीनियर्स पर अच्छी छाप छोड़ सकते हैं।
कंटीन्युअस लर्निंग
बहुत से लोगों को जॉब पाने के बाद
लगता है कि सीखने की प्रक्रिया पूरी हो गयी. टीम लीज सर्विसेस की सीनियर
वीपी नीति शर्मा ने कहा, 'सिर्फ जॉब पाने से आपका लक्ष्य पूरा नहीं होता.
आपको सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी है. करियर के गोल को आपको हमेशा
आगे बढ़ाते रहना चाहिए.'
नेटवर्किंग बढ़ाना
आपनी पहली जॉब के दौरान लोगों से बनाएं गए सम्पर्क यानि कॉन्टेक्ट हमेशा
काम आते है। लोगों के साथ बातचीत करें अपना नेटर्वक बनाएं। लोगों को
प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट पर जोड़े और उनसे संपर्क में रहें। लेकिन इस
प्रक्रिया को एकदम शुरू न करें कि लोगों को सोशल नेटवर्किंग साइट पर एड कर
लिया और उन्हें यूं ही टेक्स्ट या व्हाट्सऐप मैसेजे भेजते रहे।
प्रेशर हैंडल करना
यह चीज आपको कभी कोई नहीं सिखाता । यह खुद ही सीखना पड़ता है अगर आप पहले
ही जॉब में प्रेशर हैंडल नहीं कर पाएं तो, आपके लिए आगे आने वाली प्रोफेशनल
में जैसे आगे बढ़ेंगे आपको ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
इस बात पर हर कोई सहमत है कि स्किल को बेहतर बनाने की जरूरत है, कामकाजी
लोगों के पास समय की कमी है. ऑनलाइन कोर्स लेकर आप इस समस्या का समाधान
निकाल सकते हैं. यहां फिर से दुनिया भर के कोर्स मौजूद हैं, इसलिए यह जानना
जरूरी है कि आपके लिए क्या बेहतर है? पॉल ने कहा, 'उस कोर्स को ज्वाइन
करें जो आपको वास्तव में अनुभव दे सके, थ्योरी वाले नोट से कोई फायदा नहीं
है. आपको करते हुए सीखने की जरूरत है, सिर्फ पढ़ते हुए नहीं.'
उन्होंने कहा, 'किसी भी कोर्स को करते हुए आपको नई स्किल सीखने पर
ध्यान केंद्रित करना चाहिए, सर्टिफिकेट पर नहीं. आपका एम्प्लॉयर आपके स्किल
पर भरोसा करेगा, आपके सर्टिफिकेट पर नहीं.'
एक उद्यमी की तरह सोचें
एक बार जब आप करियर में
सीढियां चढ़ते जाते हैं तो आपको लगता है कि आपकी कुशलता पर्याप्त नहीं है.
उदाहरण के लिए आईटी सेक्टर में अधिकतर लोग प्रोग्रामर की तरह जाते हैं और
बाद में टीम लीडर बन जाते हैं. उसके बाद का पायदान मैनेजमेंट का होता है और
इसके लिए सिर्फ कोडिंग स्किल्स के काम नहीं चलेगा.
आरबीएल बैंक के एचआर हेड (सीएसआर एवं इंटरनल ब्रांडिंग) शांत वल्लूरी ने कहा, 'दूसरे वर्टिकल में काम कर अपनी योग्यता की पहचान करें. जब आप अपने करियर को जॉब की तरह ट्रीट करना बंद कर देंगे तो आप इसे एक लर्निंग ऑपरट्यूनिटी की तरह लेंगे.'
नेटवर्किंग
नेटवर्किंग करियर ग्रोथ के लिए हमेशा
बेसिक जरूरत रही है. करियर कनेक्ट के पार्टनर मुकेश भसीन ने कहा, 'कम से कम
50 फीसदी हायरिंग नेटवर्किंग के द्वारा होती है. करियर के प्रॉस्पेक्ट्स
मार्केट करने की क्षमता और लोगों से मिल पाने की आपकी काबिलियत पर निर्भर
करती है.' इन कॉन्टेक्ट्स में कॉलेज के पुराने छात्रों का ग्रुप, पुराने
सहकर्मी के अलावा लिंक्डइन और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया साईट हैं.
आप इन कॉन्टैक्ट्स का प्रयोग कर अपने संपर्क बढ़ा सकते हैं. चहल ने कहा, 'अपने नजरिये से लिंक्डइन शुरू करने के लिए बेहतर जगह है, यह इंडस्ट्री की जरूरत को समझने के लिए भी बेहतर जगह है.'
शिव अग्रवाल ने चेताया, 'आपके बहुत से नियोक्ता आपके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर नजर रखते हैं. सोशल मीडिया पर बहुत स्ट्रांग पोलिटिकल या रिलिजियस पोस्ट आपके करियर को नुकसान पहुंच सकता है.'
मदद मांगें या एक मेंटर ढूंढेंअधिकतर मामलों में जब हमें मदद की जरूरत होती है, हम हेल्प मांगते हैं. करियर प्लानिंग के लिए भी हम ऐसा ही कर सकते हैं. चहल ने कहा, 'करियर की बेहतरी के लिए जरूरी हेल्प की उम्मीद करना और इसे पाना भी एक क्वालिटी है.' जैसा कि पहले बताया गया है जॉब ढूंढ रहे लोग अपने इंस्टिट्यूट के करियर काउंसिलर या दूसरे प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं. टैलेंट स्प्रिंट के एमडी एवं सीइओ शांतनु पॉल ने कहा, 'अपने करियर को साईकिल की तरह ट्रीट करें. अगर आप एफर्ट नहीं करेंगे और पैडल नहीं मारेंगे तो यह आगे नहीं बढ़ेगी.'
ग्रूमिंग को इग्नोर न करें
नौकरी ढूंढ रहे लोगों को उन
मसलों का भी ध्यान रखने की जरूरत है जो जॉब से सीधे जुड़ी नहीं होती लेकिन
उसका महत्व काम नहीं होता. शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना ऐसी ही एक जरूरत है.
एबीसी कंसल्टेंट्स के एमडी शिव अग्रवाल ने कहा, 'अधिकतर एम्प्लायर यह मानते
हैं कि अगर आप खुद का ख्याल नहीं रख सकते तो आप कंपनी के बारे में क्या
सोचेंगे?'
एपियरेंस— ठीक से कपड़े पहनना या आकर्षक सीवी ऐसे फैक्टर हैं जिनका
ध्यान रखा जाना जरूरी है. आपका नियोक्ता इन बातों पर ध्यान क्यों देगा?
आपके बारे में धारणा ही हकीकत है और आपके बारे में बनी धारणा पर ही
नियोक्ता आपको जॉब देता है.
आप बहुत अच्छे हैं, फिर भी आपकी धारणा अच्छी होनी जरूरी है. अगर दो कैंडिडेट एक जैसे ही हैं तो जो फिजिकली फिट होगा, नियोक्ता उसे तरजीह देगा, बजाय मोटे कैंडिडेट के. शिव अग्रवाल ने कहा, 'अधिकतर नियोक्ता इसी तरह सोचते हैं. अगर आप खुद का ख्याल नहीं रह सकते तो कंपनी का ध्यान कैसे रखेंगे.'