कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कृषकों हेतु जारी की गई वैज्ञानिक... - CG Sandesh

कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कृषकों हेतु जारी की गई वैज्ञानिक सलाह

कृषि मौसम विषेशज्ञ एस.के. भुआर्य द्वारा बताया गया की जशपुर जिले में अक्टुबर माह में अब तक औसत वर्षा 48.5 मिमी दर्ज की गई है यदि तहसिल वार वर्षा की बात करें तो जशपुर, मनोरा एवं कांसाबेल ब्लॉक में 60 मिमी से अधिक वर्षा तथा शेष तहसिलों में 30-45 मिमी के मध्यम वर्षा दर्ज की गई है तथा कृषि विज्ञान केन्द्र डुमरबहार स्थित मौसम वेधशाला में 72.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई है । वही अगामी पूर्वानुमान को देखें तो जिले का मौसम अगले पांच दिनों के दौरान शुष्क बने रहने तथा आसमान में मुख्यतः साफ रहने का अनुमान है। वहीं सुबह की हवा में 90 प्रतिशत नमी होने के साथ-साथ अधिकतम तापमान 28.0-29.0 डि.से. एवं न्यूनतम तापमान 15.0-16.0 डि.से. दर्ज होने हवाओं के विभिन्न दिशाओं से औसतन 2-3 कि.मी.प्रति घण्टे की गति से चलने की सम्भावना है । श्री भुआर्य द्वारा कृषको को सलाह दी गई है की आगामी मौसम शुष्क रहने की संभावना है परिपक्व मध्यम अवधि के धान की फसलों की कटाई करें एवं सुखने हेतु 1-2 दिन ही खेतों में रखें एवं अन्य तैयार कंदीय फसलों की खुदाई करें एवं ग्रेडिंग कर विक्रय की व्यवस्था करें.

डॉ. डी.के. देवांगन शस्य वैज्ञानिक द्वारा जानकारी दी गई लम्बी अवधि धान में तना छेदक कीट का वयस्क प्रति वर्ग मीटर में एक दिखने पर फिप्रोनील 5 प्रतिशत एससी 1-1.5 लीटर या लैम्डा साइहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत एससी 250 मि.ली. को 500 लीटर पानी मिलाकर प्रति हे. की दर से छिड़काव करें तथा उसके अण्ड समूह को एकत्र कर नष्ट कर देवें एवं भूरा माहू के नियंत्रण हेतु ब्युपरोफेजीन 25 प्रतिशत एससी 800 मिली या एसीटामिप्रिड 4 प्रतिशत + क्लोरफेनापायर 20 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधे के निचले भागों तक छिड़काव करें तथा चने के जिन खेतों में उकठा एवं कॉंलर राट बीमारी का प्रकोप प्रति वर्ष होता है वहा चने के स्थान पर गेंहू, तिवड़ा, सरसों एवं अलसी की बुवाई करें अर्थात फसल चक्र अपनाये ।

डॉ. प्रदीप कुजूर उद्यान वैज्ञानिक द्वारा कृषको के लिए संदेश है कि वे टमाटर के जीवाणु जनित विल्ट रोग से प्रभावित खेतों में टमाटर, बैगन, मिर्च तथा आलू की फसल न ले फसल चक्रण अपनाते हुए बरबट्टी, गोभी अथवा मक्के की फसल लेने की सलाह दी है एवं टमाटर की फसल एक ही खेत में बार-बार लेने से बचने की सलाह दी है ।

केन्द्र प्रमुख डॉ. आर.के. भगत द्वारा धान कटाई के उपरान्त संचित नमी के उपयोग हेतु जीरो टील सीड ड्रिल द्वारा फसलों की बुवाई करने तथा बुआई पूर्व बीजों को कीट एवं रोग नाशियों तथा जैव उर्वरकों से उपचारित करने एवं अच्छी गुणवत्ता की प्रमाणित बीज ही उपयोग करने की सलाह दी है ।

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