डीजल गाड़ियां लोगों ने खरीदना आखिर क्यों कम कर दिया ,क्या है इसके पीछे की वजह ...
देश में कारों की बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है और कोरोना के बाद इसमें काफी उछाल आया है. लेकिन, पिछले कई सालों में ये भी देखने को मिला है कि अब लोगों को डीजल गाड़ियों से मोह हट गया है और बाजार में इनकी हिस्सेदारी काफी कम हो गई है. कहा जा रहा है कि पहले डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी 58 फीसदी तक हुआ करती थी, लेकिन अब यह हिस्सेदारी 17 फीसदी तक रह गई है. यानी डीजल की गाड़ियों की बिक्री में काफी गिरावट हुई है.
ऐसे में सवाल है कि पिछले कुछ सालों में ऐसा क्या हो गया है कि लोगों ने डीजल की गाड़ियां खरीदना कम कर दिया है? इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं, ये किस वजह से हो रहा है और उन कारणों के बारे में भी विस्तार से समझाते हैं ताकि आपको हाल ही में हुए बदलावों के बारे में पता चल सके.
कितनी कम हो गई डीजल गाड़ियों की बिक्री?
दरअसल, एक दशक पहले तक डीजल गाड़ियों की संख्या, पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले काफी ज्यादा हुआ करती थी. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2012-13 में डीजल गाड़ियों का मार्केट शेयर 58 फीसदी तक हुआ करता था. लेकिन, अब यह 17 फीसदी तक ही रह गया है. इसके अलावा डीजल की पुरानी गाड़ियों को चलाने के लिए भी नियम है कि कुछ सालों बाद उन्हें नहीं चलाया जा सकता, इसलिए भी इसकी कमी हो गई.
क्या है इसकी वजह?
वैसे तो पहले ही पर्यावरण की वजह से डीजल गाड़ियां निशाने पर रहती थीं. आपको याद होगा इसी वजह से ज्यादा प्रदूषण होने पर दिल्ली में डीजल बसों की जगह सीएनजी बसों का इस्तेमाल शुरू किया गया था. तो वैसे भी पर्यावरण की वजह से इसकी मांग कम हो रही थी, लेकिन पिछले सालों में एकदम से बिक्री कम होने का कारण है डीजल और पेट्रोल की कीमतों में अंतर.
दरअसल, पहले डीजल और पेट्रोल की कीमतों में करीब 20-25 रुपये का अंतर होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब ये अंतर 5-7 रुपये तक रह गया है. पहले कीमतें कम होने की वजह से लोग डीजल फ्यूल की गाड़ियां पसंद करते थे, क्योंकि उनकी लागत भी कम आती थी और माइलेज भी अच्छा मिलता था. हालांकि, अब पेट्रोल और डीजल लगभग बराबर आ गए हैं तो लोगों का मानना है कि बराबर रेट होने से पेट्रोल कार चलाना बेहतर है क्योंकि वो फाइल फ्यूल है. ये गाड़ी और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर है. इस वजह से लोगों ने पेट्रोल गाड़ियां ज्यादा खरीदना शुरू कर दिया है.
पेट्रोल डीजल की कीमतों में क्यों आ गया अंतर?
दरअसल, पहले यानी साल 2014 से पहले सरकार पेट्रोल पर ज्यादा टैक्स लगाती थी, जबकि डीजल पर सब्सिडी दी जाती थी. इससे डीजल के रेट कम थे और इसे महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए किया जाता था, क्योंकि इंडस्ट्री, किसान, ट्रांसपोर्टेशन आदि में डीजल का ही इस्तेमाल ज्यादा होता है. हालांकि, इसके बाद नियम बदल दिए गए और डीजल को डीरेगुलेट किया गया और मार्केट प्राइस के हिसाब से डीजल के दाम होने लगे. इससे डीजल के दाम भी लगभग पेट्रोल के बराबर आ गए.