महासमुंद : रोजगार की नही पलायन की चिंता ? कांग्रेस का पलायन को लेकर यूपी चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाना कितना सही ?
लगतार कई वर्षों से महासमुंद जिले में लोगों के पलायन का सिलसिला जारी है. महासमुंद जिले के 130 मजदूरों को कल शनिवार को उत्तरप्रदेश जाने से रोक दिया गया. जिसके बाद महासमुंद विधायक और संसदीय सचिव ने पलायन को मजदूर दलाल भाजपा की मिली भगत से यूपी चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए मिडिया में बयान दिया.
आपको बता दें कि इसके पहले पुलिस पर भी पलायन नही रोकने का आरोप लगाया जा चूका है. वर्षों से जारी इस पलायन पर हमेशा राजनीति गर्म रहती है. लेकिन रोजगार उपलब्ध करवाने की चिंता छोड़ पलायन होने पर चिंता जाहिर की जा रही है.
क्या कांग्रेस सरकार रोजगार देने में असफल है, इसलिए पलायन को यूपी चुनाव का मुद्दा बना रही है ? आज जमाना बदल चूका है, महासमुंद का किसान आधुनिक उपकरणों से खेती करने लगा है. जिससे गाँव में हर तबके के लोगों को प्रतिदिन रोजगार मिलना असंभव है.
कोरोना के कारण देश के कई उत्पादनों में कमी आई है, जिसके कारण महंगाई बढ़ रही है. आंकड़ों के अनुसार देश में 100 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चूका है. क्षेत्र के लोग ना केवल ईंट भट्टी, बल्कि अन्य भी कई लघु उद्योग में काम करने जाने हेतु पालयन करते है. जहाँ उन्हें काम के बदले अच्छे पैसे दिए जाते हैं. जब ये वहां से वापस आते हैं तो स्थानीय दुकानों में खरीददारी भी करते हैं, जिससे बजार में खरीददारी और बिक्री बढ़ जाती है.
अर्थव्यवस्था को विकास के दृष्टिकोण से यदि क्षेत्र में रोजगार नही है तो पलायन को रोकना कितना उचित है ? क्या प्रशासन को इसके लिए गाँव-गाँव मुनादी नही कराई जानी चाहिए, जिससे की एक पारदर्शिता रहे और पलायन करने वाले मजदुर स्वयं प्रशासन को इसकी सुचना दे. ताकि भविष्य में आवागमन बाधित ना हो और मजदुर भी किसी ऐसे चंगुल में ना फँस पायें जहाँ की वे शोषण का शिकार हों.