बसना : यात्रियों के लिए नही है प्रतीक्षालय, धुप, बरसात और ठंड में खुले आसमान के नीचे कर रहे बस का इंतजार
चिलचिलाती धुप, तेज आंधी बरसात और अब पड़ने वाली ठंड, बसना विधानसभा से हजारों की संख्या में गुजरने वाले यात्रियों के लिए ना ही कोई प्रतीक्षालय है और न ही कोई शेड बना हुआ है. यात्री धूप बारिश, और ठंड में खुले आसमान के नीचे ही बसों का इंतजार करते हैं.
इन यात्रियों में बच्चे बूढ़े, महिलाएं भी होती है. क्षेत्र अब बसना नगर से गुजरने वाली NH53 फोर लेन में यात्री प्रतीक्षालय की मांग कर रहा है.
वर्ष 2017 में सरायपाली से रायपुर की दुरी तय करने के लिए समय कम लगे इसके लिए एक्सप्रेस बस की सुविधा दी गई थी. जो सरायपाली से सीधे रायपुर तक जाती थी. बसना और पिथौरा क्षेत्र के नागरिकों के हितों को देखते हुए तत्कालीन विधायक रूपकुमारी चौधरी ने इस बस के स्टापेज की मांग बसना और पिथौरा में की थी, साथ ही बस को बस स्टैंड तक लाने की बात कही गई थी.
हलाकि बस नगर के अन्दर बस स्टैंड नहीं आई लेकिन फोर लेन हाइवे पर एक ऐसा स्थान चिन्हित कर लिया गया है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्री चिलचिलाती धुप, तेज आंधी बरसात और ठंड में बस का इन्तजार करते हैं, बसना विधानसभा के अन्दर गाँव में आपको ऐसे कई यात्री प्रतीक्षालय देखने को मिल जायेंगे जहाँ यात्री प्रतीक्षालय की जरुरत ही नहीं, जो कि शराबियों और पशुओ का भवन चूका है, जिन्हें देखकर लगेगा की यहाँ प्रतीक्षालय केवल भ्रष्टाचार करने के लिए ही बनाया गया हो, और जहाँ जरुरत है वहां नजरअंदाज किया जा रहा है.
जमाना डिजिटल हो रहा, एप्प पर भरोषा करने लगे हैं, बसना सरायपाली से रायपुर जाने के लिए भी अब ऑनलाइन टिकट की सुविधा https://www.redbus.in/ पर उपलब्ध है.
रायपुर से सरायपाली के आलावा इस मार्ग से रांची, कोलकाता, राउरकेला, संबलपुर, भुवनेश्वर, जशपुर जाने के लिए क्षेत्र के दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण रोज इस स्थान से बसों में आना-जाना करते हैं. क्योकि अधिकतर बसें नगर के अन्दर नहीं आती है. कई बसें रात को गुजरती हैं, तो कई बसें तड़के की सुबह. जहाँ अँधेरा में रोशनी बैठने का सुरक्षित स्थान और शौचालय खोजता यात्री दिखाई देता है.
यात्रियों के लिए यहाँ कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, ग्रामीणों की माने तो बड़े एवं सक्षम लोगों को तो बसों का इंतजार नहीं करना पड़ता है. इसलिए उन्हें इसकी परेशानी का अनुभव नहीं है. यही कारण है कि अब तक कोई जनप्रतिनिधि इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
नगर के अन्दर बस स्टैंड ढूंढते है लोग.
वर्त्तमान में क्षेत्र के लाखों यात्री बसना में बस स्टैंड ढूंढते है, और किसी पेड़ या दूकान के नीचे बस के आने का इंतजार करते हैं. करीब दो दशक से बसना बस स्टैंड का अस्तित्व कभी भी नजर नहीं आया. कई वर्षों तक यात्री प्रतीक्षालय में होटल बना रहा, जिसके लिए वर्ष भर तक आन्दोलन भी हुए.
इसके बाद पुराने यात्री प्रतीक्षालय जहाँ होटल संचालित किया जा रहा था उसे तोड़ दिया गया. अभी कुछ वर्ष पहले यहाँ नया प्रतीक्षालय, शौचालय, काम्प्लेक्स बनाया गया जो केवल शो-पीस बनकर रह गया है.
बसना बस स्टैंड पर करीब 100 से 150 की संख्या में निजी वाहन खड़े किये जाते हैं, जिनकी प्रशासन से मांग है कि यदि उन्हें हटाया जाता है तो उन्हें कोई अन्य स्थान दिया जाए. ऐसी स्थिति में बस, स्टैंड में अन्दर जाने की बजाय बहार सड़क पर खड़ी रहती है जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति निर्मित होती है, फिर चाहे वहां से मरीज गुजरे, विधायक गुजरे या फिर जिले के कलेक्टर.
शयद अब यात्री प्रतीक्षालय के स्थान को परिवर्तन कर देना चाहिए, जिससे यात्री खुद को सहज और सुरक्षित महसूस कर सकें.