बागबाहरा वनांचल क्षेत्र के ग्राम बोकरामुडां खुर्द में किया गया आंवला नवमी की पूजा
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाते हैं। आंवला नवमी को अक्षय नवमी के नाम से भी जानते हैं। इस साल आंवला नवमी 12 नवंबर, शुक्रवार से 13 नवंबर शनिवार को है। हिंदू धर्म में आंवला नवमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन दान करने से पुण्य का फल इस जन्म के साथ अगले जन्म में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।
आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा करते हुए परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके साथ ही इस दिन वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किया जाता है। प्रसाद के रूप में भी आंवला खाया जाता है।
जहां पर आज ग्रामीण क्षेत्र बोकरामुडां खुर्द में भी आंवला पेड़ के पास दिन भर पूजा पाठक कर शाम के तो वक्त मां लक्ष्मी जी अपने गांव में विराजमान करवाते हैं और रात भर माटी गुड़ी में झाकर पूजा पाठ करते हैं और रात्रि जागरण एवं भजन कीर्तन क्या जाता है.