17 नवंबर राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर जाने केसे करे देख भाल और उपचार।
मनोचिकित्सकिय सामाजिक कार्यकर्ता रामगोपाल खूँटे मेडिकल कॉलेज सम्बंध जिला चिकित्सालय महासमुंद द्वारा बताया गया। आज मिर्गी दिवस है। मिर्गी रोगियों के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने के उद्धेश्य से हर वर्ष भारत में 17 नवंबर को मिर्गी दिवस मनाया जाता है। मिर्गी मानव शरीर के मस्तिष्क में होने वाली एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल विकार (Neurological disorder) है। जिसके कारण लोगों को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं; मिर्गी के अंतर्गत व्यक्ति के मस्तिष्क को कोशिकाओं में अत्यधिक तेजी से विद्युत का संचालन होने की वजह से दौरे जैसी स्थिति बन जाती है। और कुछ ही देर में व्यक्ति देखते ही देखते बेशुध हो जाता है।
मिर्गी की बीमारी किसी भी उम्र को प्रभावित कर सकती है। लेकिन अलग-अलग उम्र में इस बीमारी के लक्षण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कुछ आंकड़े प्रदर्शित किए गये हैं। जिनमें दर्शाया गया है कि पूरे विश्व में 50 लाख से अधिक लोग मिर्गी की बीमारी के शिकार हैं। जबकि भारत में करीब 10 लाख लोग मिर्गी रोग के प्रभाव में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ज्यादातर लोग लगभग 80 प्रतिशत विकासशील देशों के है।
जानें क्या होते है मिर्गी लक्षण -
दौरे आने के पूर्व कुछ इस तरह के यदि किसी को इस तरह के संकेत दिखाई दें तो यह मिर्गी के लक्षण हो सकते है।यदि अचानक से शरीर लडखडाने लगता है। हाथ-पैरों में कंपन होने के बाद अनियंत्रित हो जाता है। तथा शरीर में झटके जैसे आते है तो यह मिर्गी के लक्षण है।बेहोशी के हालत होना।
अचानक से हाथ और पैरो में सनसनी आना भी मिर्गी के लक्षण है ।जब हाथ और पैरों की मांसपेशियों का जकड़ जाना इत्यादि लक्षण मिर्गी रोगियों में दिखाई देते है।
मिर्गी रोग के कारण -
मिर्गी रोगियों के लिए कुछ कारण जिम्मेदार माने जाते है। जिसके कारण मिर्गी होने की संभावना अधिक होती है।
यदि किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में कोई चोट लगी हो तो मिर्गी होने की संभावना होती है।
किसी महिला के डेलिवरी के समय यदि कोई चोट लग जाती है तो ऐसे में भी मिर्गी आने लगती है।
यदि किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में कोई इंफेक्शन हो गया हो तो भी मिर्गी आने लगती है।
जिन व्यक्तियों को स्ट्रोक एवं ब्रेन ट्यूमर की समस्या होती है उनको भी मिर्गी की शिकायत हो सकती है।
किसी कारण से व्यक्ति के सिर में चोट या फिर किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो मिर्गी के दौरे पड़ने लगते है।
कम उम्र में यदि किसी के तेज बुखार या फिर कोई तपेदिक रोग से पीडित रहा हो तो भी मिर्गी का शिकार हो सकते है।
मिर्गी का आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से मिर्गी रोग को समाप्त किया जा सकता है। आयुर्वेदिक दवाएं आपके होने वाले मस्तिष्क के इस विकार को नियंत्रित करके आपको मिर्गी की बीमारी से बचाने में मदद कर सकती है।
आयुर्वेद में इपिलेप्सी के उपचार में अश्वगंधा, शतावर, गिलोय और सफेद मूसली बहुत ही असर कारक आयुर्वेदिक हर्बल औषधियां है। जिनका सेवन आप किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर कर सकते है। यह औषधियां आपको मिर्गी के अटैक से बचाएंगी
मिर्गी रोगियों की देखभाल और रोकथाम कैसे करें -
यदि घर के किसी सदस्य को मिर्गी की समस्या है तो उसके लिए कुछ सावधानियां है जो आपको बर्तनी चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ा है तो बिल्कुल भी घबराएं नही बल्कि स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश करें।
पीडित व्यक्ति से पास से धारदार और हानि पहुचांने वाली वस्तुओं को दूर रख दें।
यदि पीड़ित व्यक्ति की जीभ बाहर आती है तो उसके मुंह में कुछ मत डालें।
पीड़ित व्यक्ति की गर्दन यदि किसी तंग कपड़े से कसी है तो उसे पूरी तरह अलग कर दें और उसके सिर के नीचे आराम दायक ताकिया लगा दें।
मनोचिकित्सकिय सामाजिक कार्यकर्ता की सलाह
छत्तीसगढ़ प्रदेश के हर जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज में में मिर्गी के इलाज की सुविधा है। वहा पर्याप्त मात्रा में ंंमनोरोग विभाग स्पर्श क्लिनिक में नि:शुल्क दवाई प्रदाय की जाती है। प्रारंभ में मिर्गी के लक्षण दिखाई देते है तो समझ में नही नही आता। गांव में मिर्गी के इलाज के लिये बेगा गुनिया ओझा बाबा से झाड़ फूंक भी कराते पर वह कारगर नही है। मिर्गी के इलाज लम्बा चलता है। कम से कम 5 साल लगातार दवाई की आवस्यकता पड़ती है। किसी भी प्रकार से लापरवाही से उनकी मौत तक हो जाती है।
मनोचिकित्सकिय सामाजिक कार्यकर्ता रामगोपाल खूँटे मेडिकल कॉलेज सम्बंध जिला चिकित्सालय महासमुंद द्वारा बताया गया।