नपा अध्यक्ष द्वारा भागवत कोसरिया की स्मृति में बनने वाले सामुदायिक भवन के लिए अनुमति नहीं देने की बात कहते हुए फाइल को फेंके जाने की घटना समाज विशेष का अपमान - कृष्णा चंद्राकर
महासमुंद: नगरपालिका उपाध्यक्ष कृष्णा चंद्राकर ने पीआईसी की बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा भागवत कोसरिया की स्मृति में बनने वाले सामुदायिक भवन के लिए अनुमति नहीं देने की बात कहते हुए फाइल को फेंके जाने की घटना को समाज विशेष का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि इससे नगरपालिका अध्यक्ष की ओछी मानसिकता का पता चलता है।
नगरपालिका उपाध्यक्ष कृष्णा चंद्राकर ने बताया कि संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर के प्रयास से स्व भागवत कोसरिया की स्मृति में सामुदायिक भवन का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए शासन से एक करोड़ रूपए की स्वीकृति मिली है। जिस पर इसकी अनुमति और टेंडर के लिए फाइल पीआईसी की बैठक में रखा गया। लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष ने ओछी मानसिकता का परिचय देते हुए यह कहते हुए फाइल फेंक दिया कि भवन निर्माण के लिए इतनी राशि की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही नगर विकास के लिए शहर के वार्डों में विधायक के प्रयास से मिली स्वीकृति की अनुमति भी नहीं दी गई। इससे साफ है कि नगरपालिका अध्यक्ष को नगर विकास से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी स्व भागवत कोसरिया की स्मृति में एक करोड़ की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन के लिए अनुमति नहीं देेना न केवल कोसरिया का अपमान है बल्कि पूरे समाज का अपमान है।नगरपालिका उपाध्यक्ष चंद्राकर ने कहा कि स्व भागवत कोसरिया की समाज के प्रति त्याग एवं समाजिक उत्थान के लिए किए गए कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी स्मृति में समाज के लोगों ने सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण की मांग थी। जिसे गंभीरता से लेते हुए संसदीय सचिव व विधायक चंद्राकर ने नगरीय प्रशासन मंत्री का ध्यानाकर्षित कराया था। जिस पर स्व भागवत कोसरिया सामुदायिक भवन निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष ने उक्त कार्य के लिए अनुमति नहीं देते हुए फाइल को फेंकना पूरे समाज को अपमानित किया है। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांछी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी नपाध्यक्ष का रवैया हमेशा विरोध का रहता है। जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।