बसना: संस्कार साहित्य मंच छत्तीसगढ़ का काव्यगोष्ठी सह स्नेह ... - CG Sandesh

बसना: संस्कार साहित्य मंच छत्तीसगढ़ का काव्यगोष्ठी सह स्नेह मिलन

19 नवम्बर को संस्कार साहित्य मंच का स्नेह मिलन सह काव्यगोष्ठी का कार्यक्रम तोषगांव की पावन धरा पर गीधामुड़ा बांध की प्राकृतिक तलहटी में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में संक्षिप्त बैठक में मंच के आगामी कार्यक्रम एवं मंच को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु कार्ययोजना पर चर्चा की गई। तत् पश्चात प्रीति भोज के कार्यक्रम के पश्चात रंगारंग काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसमें मंच के सभी सदस्यों ने भिन्न-भिन्न रस में काव्य गंगा बहाया।
काव्यपाठ की शुरुआत मंच संचालक गणपत देवदास के संचालन में हुई जिसमें परशुराम चौहान ने अपने मधुरिम कंठ से मां शारदे की वंदना की। काव्यपाठ में प्रथम काव्य आहुति के रूप में ललित भार ने अपनी क्षणिकाओं से मंच में समा बांधने का काम किया। अगले क्रम में सुंदर लाल डडसेना मधुर ने कार्तिक पूर्णिमा पर शानदार काव्यपाठ किया।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में सुकमोती चौहान रुचि ने वीर रस एवं श्रृंगार रस की छंदमई प्रस्तुति दी। तत् पश्चात विनोद कुमार चौहान जोगी ने चुनावी मुक्तक एवं छुट्टी की कुंडलियां प्रस्तुत करके स्रोताओं की वाहवाही लूटी। अगले क्रम में आए नीलेश साहू जी ने अपनी प्रथम प्रस्तुति में ही व्यंग्यात्मक लहजे से कुंडलियां प्रस्तुत कर सभी लोगों का दिल जीत लिया। इसके पश्चात रोमा भार ने भी प्रथम प्रस्तुति स्वरूप बेटियों पर अपनी रचना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर ने अपनी कोहिनूरी आभा बिखेरते हुए बेटियों पर साथ ही छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना स्वरूप गीत प्रस्तुत किया। अगले क्रम में आए श्रृंगार की कवयित्री रूक्मणी प्रमोद भोई ने श्रृंगार रस से सराबोर प्रस्तुति दी। तत् पश्चात आए मंच के हंसी के गोले मानक दास मानिकपुरी उर्फ मानक छत्तीसगढ़िया ने गुटखा- खैनी खाने वालों पर तंज कसा। अगले क्रम में परशुराम चौहान ने श्रृंगार के ग़ज़ल से सभी को झूमने का अवसर प्रदान किया। तथा उनके पश्चात धनीराम नंद मस्ताना ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मधुरिम गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में गणपत देवदास ने अपनी कविता में भिन्न-भिन्न वर्ग के लोग ईश्वर से क्या-क्या मांगते हैं उसे बड़े ही सुंदरतम ढंग से प्रस्तुत किया। और इस तरह आगामी दिनों में रंगारंग काव्यपाठ की कामना लिए कार्यक्रम का समापन हुआ।


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