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बागबाहरा : आडिटर और प्राचार्य के विरुद्ध FIR की मांग, जाने क्या है मामला.

शासकीय कुलदीप निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नर्रा  की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने  आडिटर और प्राचार्य विरुद्ध FIR व तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है.

समिति के अध्यक्ष ने बताया कि 30 मई 2019 में पूर्व में जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा गठित आडिट पार्टी ने निहित स्वार्थ के चलते जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के कार्यालय पदस्थ आडिटर आर.साहू के आडिट रिपोर्ट के आधार पर प्राचार्य गजराज पाडे को क्लीन चिट प्रदान कर दिया था.

इसके बाद 18 अगस्त 20 को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया कि तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य गजराज पाडे द्वारा अपने पद में रहते हुए शाला निधि का गबन एवं अनेक वित्तीय अनियमितता बरतते हुए स्वयं के लाभ के लिए शाला निधि को 2 लाख 8 हजार रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई.

पारित प्रस्ताव के परिप्रेक्ष्य में शाला प्रबंधन एवं विकास के अध्यक्ष विजय शंकर निगम द्वारा दिनांक 21 सितम्बर 20 को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को बिन्दुवार शिकायत प्रेषित की गई.

शिकायत की गम्भीरता को देखते हुए दिनांक 3 अक्टूबर 20 को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा के.आर.क्वाची विकास खंड शिक्षा अधिकारी बागबाहरा और ए.एस.ध्रुव प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बीके बहरा की जांच दल गठित कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया.

इसके बाद 21 अक्टूबर 21 को जांच दल द्वारा अपना प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को प्रेषित किया गया.

जिसमें दोनो अधिकारियों ने अपना अभिमत दिया. जांच दल के दोनों अधिकारियों ने पाया कि गजराज पाडे तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य शा.उ.मा.वि.नर्रा द्वारा निम्न आर्थिक अनियमिततायें पाई

जिसमे क्रीड़ा फंड में 10 हजार, परीक्षा निधि में 52,250, रेडक्रास में 9211, क्रियाकलाप में 6,590, स्काउट गाइड में 325, विज्ञान फंड में 4800, शाला प्रबंधन एवं विकास समिति 4500, राष्ट्रीय शिक्षा मिशन में 28947, अन्य प्राथमिक सहकारी समिति में 3000 रुपये विभिन्न मदो मे कुल 1,20,623 रुपये की आर्थिक अनियमितता पाई गई. जांच दल राशि वसूली की अनुशंसा की कर आवश्यक कार्यवाही हेतु संप्रेषित किया गया.

आपको बता दें कि शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद से मांग की है कि गजराज पाडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएं साथ ही साथ उनके विरुद्ध F.I.R.भी दर्ज़ कराई जावे.

शाला प्रबंधन एवं विकास समिति यह भी मांग करती है कि आडिटर आर.के.साहू के विरुद्ध भी झुठी आडिट रिपोर्ट देने के लिए कार्रवाई की जाए.


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