बसना नगर में हुई तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में 3 आरोपितों को... - CG Sandesh

बसना नगर में हुई तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में 3 आरोपितों को मिली जमानत.

रविवार 6 फरवरी को लव जिहाद के मामले में बसना नगर में हुई तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में 3 आरोपितों को कल बुधवार को सरायपाली न्यायालय से जमानत मिल गई. तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में पुलिस से हुई शिकायत के बाद बसना पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था. जिन्हें जमानत मिलने के बाद महासमुंद जेल से रिहा कर दिया गया.

मामले के आरोपियों को महासमुंद से वापस लाने के समय राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष महेंद्र साव के साथ जिलाध्यक्ष मोहन सोनवानी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे. जहाँ आरोपियों को रिहा होने के बाद माला पहनाकर स्वागत किया गया. और इस दौरान जय श्रीराम के नारे लगते रहे.

वहीं इस खबर को सुनते ही हिन्दू संगठन के लोगों ने सोशल मिडिया में बधाई देने का दौर शुरू कर दिया और जय श्री राम के नारे के साथ कई लोगों ने कमेंट किये.

आपको बता दें कि विवाद के बाद नगर में शांति व्यवस्था कायम रखने हेतु बड़ी संख्या में पुलिस अपने दल बल के साथ मौजूद रही, इस दौरान पुलिस लागातार पेट्रोलिंग और और मुखबिरों के माध्यम से नगर पर निगरानी रखती रही.

इस मांग को लेकर हिन्दू संगठन ने किया गया था आन्दोलन.

आपको बता दें कि क्षेत्र में एक लड़की के साथ लव जिहाद करने का मामला सामने आया था, जिसपर कार्रवाई नहीं होने से हिन्दू समाज ने आन्दोलन किया. और लड़की को बसना लाकर उसके परिजनों को वापस सौंपने की मांग की. इसके लिए संगठन को सड़क पर बैठकर आन्दोलन करना पड़ा.

इस मामले को शांत करवाने पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बसना पहुंची, लेकिन इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ और तोड़फोड़ किये जाने की बात सामने आई.

आन्दोलन को उग्र होता देख लड़की को महासमुंद के सखी सेंटर से बसना बुलाया गया, नवभारत में छपी खबर के अनुसार प्रतिनिधि मंडल और लड़की के माता-पिता द्वारा कई घंटो तक लकड़ी को समझाने की कोशिश की गई जो नाकाम रही. लकड़ी अपने माता पिता के साथ जाने को तैयार नहीं हुई जिसमे बाद उसे पूरी सुरक्षा के साथ महासमुंद सखी सेंटर वापस भेज दिया गया.

वहीं इस मामले में राष्ट्रीय बजरंग दल के जिला अध्यक्ष मोहन सोनवानी का कहना है कि मामले के दो आरोपी रितेश साहू और नीरज दास ने किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की है. पुलिस ने दुसरे पक्ष के दबाव में आकर इस तरह की कार्यवाही की है, इस मामले में सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए और इसकी न्यायिक जाँच की जाए.


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