महासमुन्द : सहारा इंडिया कंपनी के विरूद्ध मामला दर्ज.
महासमुन्द थाना अंतर्गत सहारा इंडिया ब्रांच में जमा की गयी राशि को पूर्व अवधी तिथी होने के पश्चात भी कम्पनी द्वारा निवेशको का उक्त जमा मशरूका 15000000 रू. को वापस न करने पर मामला दर्ज.
गणेश प्रसाद चन्द्राकर ने पुलिस को बताया कि सहारा इंडिया ब्रांच महासमुन्द मे वह सन 2005 से एजेन्ट के रूप मे ज्वाईन किया है, वह सहारा इंडिया ब्रांच महासमुन्द में काम करके बहुत सारे निवेशकर्ता के लोगो को बाण्ड भराकर पैसा जमा कराकर सदस्य बनाया है । वह 2012 से अपने नाम से 12 बांड लिया व उसके पत्नि श्रीमती कमलेश्वरी चन्द्राकर के नाम से 7 बांड है, जिसकी मेच्यूरटी दिनांक जून 2018 से जनवरी 2019 को अधिकाश बांड का मेच्यूरटी हो गया है, एवं कुछ बांडो का मेच्यूरटी अगस्त 2020 को है।
उनका, पति और पत्नि का कुल 19 बांड है जिसमे 16 फरवरी 22 तक कम से कम मेच्यूरटी राशि लगभग 16,00,000/- रूपये अक्षरी सोलह लाख ब्याज के साथ होता है, एवं उसके द्वारा अन्य कई जमाकर्ताओ की मेच्यूरटी राशि डेढ करोड रूपये होती है, जो अभि तक पैसा अप्राप्त है। जमाकर्ताओ द्वारा उसे घर मे आकर व रोड में कही भी मुलाकात होने पर गाली गुप्तार किया जाता है जिसे सुनकर रहना पडता है।
इसी बीच उसकी बेटी अदिती चन्द्राकर का रोड एक्सीडेन्ट सन् 20 अगस्त 20 को हुआ था, जिस समय उसे पैसा की सक्त जरूरत थी, उस समय वह पैसा के लिये आवेदन सहारा इंडिया ब्रांच महासमुन्द मे लगाया था कि बिटिया के ईलाज के लिये पैसा मील जायेगा तब उस समय अधिकारी के द्वारा बोला गया है कि अभि तो रायपुर से पैसा नही आया है, जिसके वजह से आपका पैसा नही दिया जा सकता है। कि उसके मुसीबत पर सहयोग की आशा किये थे जो निराशा ही हाथ लगी। उन लोगो से पैसा लेकर मिच्यूरीटी हो जाने के बाद भी उसको पैसा नही दिया जा रहा है। उसे सहन नही हो रहा है वे भारी परेशान है। सहारा इंडिया ब्रांच मे उसका 19 बांड एवं अन्य निवेशको का ब्रांड मेच्युरीटी होने के बाद भी अभितक उसका पैसा नही दिया गया है, यह घोर निदनिय बात है इसमे उपर बैठे जितने सहारा इंडिया के डायरेक्टर सुब्रोतो राय व क्रेडिट काआपरेटीव प्रमुख ओ पी श्रीवास्त एवं छत्तीसगढ के प्रमुख जीवराज सिंह और महासमुन्द के सेक्टर अधिकारी आलोक सुहाने है। आवेदन जांच पर प्रथम दृष्टया अपराध धारा 406 भादवि एवं 3,4 ईनामी चीटफंड व धन परिचालन स्किम पाबंधी अधिनियिम का अपराध पाये जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।