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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला जागृति शिविर का हुआ आयोजन

जांजगीर चांपा एकीकृत बाल विकास परियोजना डभरा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर परियोजना स्तरीय महिला जागृति शिविर का आयोजन शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर बघौद के शाला प्रांगण में आयोजन किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत महिला बाल विकास के पर्यवेक्षकों द्वारा पुष्पगुच्छ से किया गया। पर्यवेक्षक भावना नेताम ने कार्यक्रम की रूपरेखा इस शिविर के आयोजन के संबंध में प्रकाश डालने के लिए एकीकृत बाल विकास परियोजना डभरा के परियोजना अधिकारी अनीमा मिश्रा को मंच पर आमंत्रित किया।

बता दें कि 8 मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेष महिलाओं का दिन है इस दिन सभी जगह महिलाओं पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित की जाती है। इसी तारतम्य में बघौद शाला परिसर में भी विश्व महिला दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें विभाग के द्वारा महिलाओं पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किये।

बदलाव तभी संभव है जब पुरुष महिलाओं के साथ समानता का व्यवहार करें:- अनिमा मिश्रा

परियोजना अधिकारी अनीमा मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई देते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हम लैंगिक असमानता कैसे समाप्त कर सकते हैं। संविधानिक सूची के साथ साथ सभी प्रकार के भेदभाव या असमानताएं चलती रहेगी लेकिन वास्तविक बदलाव तो तभी संभव है। जब पुरुषों की सोच को बदला जाये। यह सोच जब बदलेगी तब सभी में मानवता का एक अद्भुत स्वरूप दिखेगा। पुरुष महिला के साथ समानता का व्यवहार करना शुरू करे न कि उन्हें अपना अधिनस्थ समझे। यहां तक कि सिर्फ आदमियों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी आज की संस्कृति के अनुसार अपनी पुरानी रूढ़िवादी सोच बदलनी होगी और जानना होगा कि वो भी इस शोषणकारी पितसत्तात्मक व्यवस्था का एक अंश बन गयी है। और पुरुषों को खुद पर हावी होने से सहायता कर रही है। हम केवल उम्मीद कर सकते हैं कि हमारा सहभागी लोकतंत्र आने वाले समय में और पुरुषों और महिलाओं में सामूहिक प्रयासों से लिंग असमानता की समस्या का समाधान ढूंढने में सक्षम हो और सभी के सोच व कार्यों की वास्तविकता के साथ सपने में पोषित आधुनिक समाज की ओर ले जायेगा। प्रत्येक बच्चे का अधिकार है कि उसकी क्षमता के विकास का पूरा मौका मिले लेकिन लैंगिक असमानता की कुरीतियां वजह से वह ठीक से फल फूल नहीं पाते हैं। भारत में लड़कियां और लड़कों के बीच न केवल उनके घरों और समुदायों मैं बल्कि हर जगह लिंग असमानता दिखाई देती है। समाज में लड़कियों के महत्व को बढ़ाने के लिए पुरुषों महिलाओं सभी को संगठित रूप से मिलकर चलना होगा समाज की धारणा वह सोच बदलेगी तभी भारत की सभी लड़कियों और लड़कों को लड़कियों की सशक्तिकरण के लिए केंद्रित निवेश और सहयोग की आवश्यकता है। उन्हें शिक्षा कौशल विकास के साथ-साथ सुरक्षा प्रदान करना होगा तभी ही वे देश के विकास में योगदान कर सकेगी।

इस कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत सदस्य तुलसी देवी साहू ने महिला दिवस पर महिलाओं को शुभकामना देते हुए कहा आज का दिन महिला दिवस विशेष दिन है क्योंकि नारी का सम्मान सदैव होना चाहिए जो स्वयं नारी स्वरूपा है। भारतीय संस्कृति ने शक्ति स्वरूपा नारी को पूज्य माना है। वही नए दौर ने यह सम्मान एक दिवस विशेष तक सीमित कर दिया है। परंतु नारी में वह शक्ति छुपी होती है जो सीमित संसाधनों के साथ दे बुलंदियों को छूने की ताकत रखती हैं।

महिला सशक्तीकरण और रोजगार के क्षेत्र में वृद्धि हुई है:- शोभा चाहिला

महिला कांग्रेस प्रदेश सचिव शोभा चाहिला ने उपस्थित महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं के संबंध में हितग्राही मूलक योजना की जानकारी दी व राज्य सरकार श्रमिक परिवार की बेटियों की शिक्षा रोजगार स्वरोजगार तथा विवाह में सहायता के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना संचालित की है। उन्होंने कहा कि कौशल्या मातृत्व योजना का भी शुभारंभ किया गया है इस योजना के तहत राज्य में जन्म लेने वाली बालिकाओं की अच्छे भविष्य के लिए उनके माता-पिता को प्रोत्साहित करने के लिए ₹5000 की राशि दी जाने की व्यवस्था है। आगे जिला पंचायत सदस्य कविता पटेल ने महिलाओं कि सामाजिक स्थिति आर्थिक राजनीतिक सामाजिक कार्यों मे उनकी भूमिका व योगदान पर प्रकाश डाला। जिला पंचायत अध्यक्ष यनिता चंद्रा ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। भारत में महिलाओं को देवी समान माना जाता है। संस्कृत में एक श्लोक है। यत्र नार्यस्तु पूजयंते रमन्ते तत्र देवता। यानि कि जहां नारी की पूजा होती है। वहां देवता निवास करते हैं आज महिलाओं के प्रति लोगों की सोच में थोड़ा सा बदलाव आया है लोग अपने घर की बेटियों और बहूओं की शिक्षा के लिए आगे बढ़ा रहे हैं। नारी केवल एक घर की नहीं बल्कि देश की शान होती है। पहले की तुलना में महिलाएं आज ज्यादा सक्षम है

अब महिलाएं अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल करना जानती हैं।आज हर क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियां गिनाई जा सकती है। इस दौरान अतिथियों द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई, युवा 6 माह पूर्व के बच्चों का अन्नप्राशन की रस्म अदा की गई। इस कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था। जिसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया कुर्सी दौड़ में जानकी सिदार प्रथम और द्वितीय भगवती पटेल, तृतीय पुष्पा सिदार स्थान पर रही मटका फोड़ में पुष्पा सोनी प्रथम स्थान हासिल किया।
पर्यवेक्षक भावना नेताम ने महिलाओं को 6 साल तक बच्चों की उचित देखभाल संतुलित आहार पोषण जागरूकता बाल विवाह बाल मजदूरी आदि विषयों के संबंध में जानकारी दी सामाजिक कार्यकर्ता डिग्री लाल सिदार ने अपने उद्बोधन से महिलाओं को प्रोत्साहित किया और महिलाओं को ग्राम सभा में भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया अपनी स्वरचित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर आधारित छत्तीसगढ़ी कविता मौला तय झन मार ओ शीर्षक से कविता पाठ किया। अतिथियों ने पोषण के महत्व को दर्शाते हुए रेडी टू ईट से बने हुए छत्तीसगढ़ी व्यंजन की प्रदर्शनी का निरीक्षण कर प्रथम द्वितीय आने वाले प्रतिभागियों को इनाम वितरण किये।

कार्यक्रम का सफल संचालन जिला पंचायत अध्यक्ष यानिता चंद्रा, जिला पंचायत सदस्य राम बाई सिदार, कविता पटेल, प्रदेश सचिव महिला कांग्रेस शोभा चाहिला, पूर्व जिला पंचायत सदस्य तुलसी देवी साहू, सभापति युवराज पटेल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पितांबर पटेल, सरपंच ग्राम पंचायत बघौद गोपेश सिदार, उपसरपंच उद्धव राम बंजारे, सामाजिक कार्यकर्ता डिग्री लाल सिदार, शिक्षक जनगणना सिदार, डी पी पटेल, जनप्रतिनिधि गण आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्व सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी। भावना नेताम महिला बाल विकास के पर्यवेक्षक भगवती चंद्रा, प्रेमा चंद्रा, प्रियतमा धांधी, भावना नेताम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लता पटेल, पुष्पा सोनी, सुमित्रा टंडन, देव कुंवर, राजेश्वरी, सुनीता, सरस्वती सिदार नीनी, ललिता, शांति सिदार, उज्जवला, भगवती, शकुंतला, इतवारी, नीला डनसेना उपस्थित रही।


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