प्लास्टिक के दाने नही.... फोर्टिफाइड चावल.. दूर होगी कुपोषण ... - CG Sandesh

प्लास्टिक के दाने नही.... फोर्टिफाइड चावल.. दूर होगी कुपोषण और एनीमिया की समस्या..

बसना क्षेत्र के कई गाँव में पीडीएस दुकानों से चावल में प्लास्टिक के दाने बांटे जाने की बात कही रही है. जिसे लेकर ग्रामीणों में भय की स्थिति है.

जानकारी के मुताबिक उक्त प्लास्टिक का दिखने वाला चावल फोर्टिफाइड चावल है. इस चावल में विटामिन एवं मिनरल यथा - फोलिक एसिड, आयरन आदि निर्धारित मात्रा में मिलाया जाता है.

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कुपोषण एवं अनीमिया मुक्त भारत योजना के तहत उक्त किस्म का चावल जनवितरण प्रणाली, एमडीएम एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है.

छत्‍तीसगढ़ के 12 जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशनकार्डधारियों को फोर्टिफाइड चावल दिया जा रहा है. आधिकारिक तौर पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10 आंकाक्षी जिलों और दो हाईबर्डन जिलों में मार्च 2022 से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य योजना के राशनकार्डधारी परिवारों को फोर्टिफाइड चावल बांटा जाएगा. राईस फोर्टिफिकेशन का 100% खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा. यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में किया गया है.

'फोर्टिफाइड' चावल आयरन और विटामिन से युक्त होता है. इस चावल में विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी12, फोलिक एसिड, आयरन और जिंक सभी पोषक तत्व का मिश्रण होता है. यह लोगों की डाइट में आवश्यक पौष्टिक तत्वों की पूर्ति के साथ ही कुपोषण के नियंत्रण में काफी हद तक मददगार होता है.

यह 'फोर्टिफाइड' चावल के कुछ दाने वितरण किये जाने वाले में मिलाया जाता है. यह चावल राशन कार्ड से मिलेगा. राशनकार्ड से खाद्यान्न लेने वाले के लिए यह भोजन के साथ दवा का भी काम करेगा.

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के मुताबिक, देश के करीब 65 फीसद लोग भोजन में चावल का उपयोग करते हैं. ऐसे में फोर्टिफाइड चावल कुपोषण के खिलाफ जंग (Fortified Rice Benefits & Malnutrition) में प्रभावी भूमिका निभा सकेगा. एक अध्ययन के अनुसार, देश में 6 माह से 5 साल के 59 फीसद बच्चे, 15 से 50 साल की 53 फीसद महिलाएं और इसी आयु वर्ग के 22 फीसद पुरुषों में आयरन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है.


अन्य सम्बंधित खबरें