बसना : महुआ की महक से महकने लगे गाँव, बना ग्रामीणों के आय का... - CG Sandesh

बसना : महुआ की महक से महकने लगे गाँव, बना ग्रामीणों के आय का स्रोत

इन दिनों बसना क्षेत्र के वनांचलों में बसे गाँव महुआ की महक से महकने लगे. यह महक भी यहाँ पहुँचने वालों को मदहोश करने लगी है.

बसना के पिरदा और भंवरपुर क्षेत्र के जंगली क्षेत्रों में अब पेड़ों से महुआ बरसने लगे हैं. इस क्षेत्र के ग्रामीण महुआ को लेकर काफी उत्साहीत नजर आ रहे हैं. महुआ पेड़ पर बेहतर फूल व श्वेत रसीले फल लदे हुए हैं. यहां के जंगलों में काफ़ी मात्रा में महुआ के वृक्ष मौजूद हैं. ऐसे में जंगल के समीप बसे गांव के ग्रामीण अब महुआ उठाने में जुटे हुए हैं. इस काम में महिलाएं बच्चे और पूरा परिवार लगा हुआ है. लोग बोरी, कांवर और अपनी टोकरियों में भरकर इसे ले जा रहे हैं. 

ग्रामीणों का कहना है कि इन फलों को सुखाकर बेचने से उन्हें पच्चीस से तीस रुपए मिलते हैं. जिसे बेचकर उनकी आमदनी हो जाती है.

छत्तीसगढ़ में हर वर्ष लगभग 170 करोड़ रूपए मूल्य के 05 लाख क्विंटल महुआ फूल का संग्रहण होता है. अपनी गुणवत्ता और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही नई तकनीक आदि की सुविधा से इसकी महक अब देश ही नहीं अपितु विदेश तक होने लगी है. महुआ फूल को 10 रूपए, सूखा फूल 50 रूपए प्रति किलोग्राम प्रति किलोग्राम के दर पर राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संग्रहण किया जाता है.

इसके साथ ही क्षेत्र में महुआ फूल का उपयोग देशी महुआ शराब बनाने के लिए किया जाता है. कई गाँव में घरों पर ही लोग महुआ शराब बना रहे हैं और उसे बेच भी रहे हैं.

कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन लगने से महुआ शराब की डिमांड काफी बढ़ गई है. इसके बाद देशी शराब के महंगे होने से लोग अब महुआ शराब में ही दिलचस्पी लेने लगे हैं. जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग अब महुआ शराब ही बनाने लगे हैं. कुछ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ के 40% तक घरों में महुआ शराब बनाया जाता है. इसमें महिलायें भी जुड़ी रहती है.

जानकारी के अनुसार फिलहाल बाज़ार में अवैध रूप से बिक रही महुआ शराब की कीमत 200 रुपये प्रति लीटर है. 5 लीटर का 700 रुपये लिया जाता है. और 5 लीटर शराब एक बार बेचने से विक्रेता की 400 रुपये तक की आमदनी होती है. लॉकडाउन के बाद कई लोगों ने इसे अपनी आय का जरिया बना लिया है.

वहीँ बसना थाना के ग्राम देवरी-पिलवापाली के एक ग्रामीण ने बताया कि लॉकडाउन के बाद उनके गाँव में कई लोग महुआ शराब बेचने लगे थे, जिसके बाद उनके गाँव में प्रस्ताव पारित कर पूर्ण शराबबंदी कर दिया गया लेकिन यह शराबबंदी गाँव के कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रहा है. जो वहां पहले शराब बनाते थे वे आज भी बना रहे हैं. केवल चिल्ल्हर बेचकर जीवन यापन करने वालों को प्रतिबंध कर दिया गया है.

सूत्रों की माने तो महुआ शराब का व्यापार क्षेत्र में अत्यंत ही फल फूल रहा है. कई लोग रोजाना 50 से 100 लीटर तक महुआ शराब बेच रहे हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ शराब अब कई जगहों पर प्लास्टिक में भरकर बेचा जा रहा है, जो लोगों को आसानी से उपलब्ध हो जाता है.


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