बसना : गुरुतेग बहादर जी का स्वरुप, विश्व का सबसे छोटा गुरुग्... - CG Sandesh

बसना : गुरुतेग बहादर जी का स्वरुप, विश्व का सबसे छोटा गुरुग्रंथ साहिब का नगरवासियों ने जोर-शोर से किया स्वागत.

सिक्खों के नौवें गुरु श्री गुरुतेग बहादर के 400 वे साल प्रकाश पर्व के अवसर पर ऐतिहासिक संदेश यात्रा आज रविवार को बसना पहुँचीं । इस संदेश यात्रा का नगरवासियों ने बड़े जोर-शोर से स्वागत किया ।

इस संदेश यात्रा में छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा भी शामिल रहे. जिन्होंने मिडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सिख समाज छत्तीसगढ़ के द्वारा गुरु तेगबहादर की यात्रा संदेश पुरे छत्तीसगढ़ में निकली हुई है. जो आज बसना पहुँची हुई है. इस संदेश यात्रा में गुरु तेगबहादर जी के संदेश उनकी जीवनी, उनके उद्देश्य और उन्होंने जो अपने जीवन के त्याग और बलिदान दिया है इस संदेश को आम जनता द्वारा पहुँचाने का काम किया जा रहा है.

अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा ने बताया कि इसके साथ-साथ 23 और 24 अप्रैल को रायपुर के साइंस कॉलेज में सिख समाज द्वारा एक बड़ा आयोजन किया जायेगा. जिसका सिख समाज का कार्यक्रम किया जायेगा.

उन्होंने बताया कि इस संदेश यात्रा में गुरुतेग बहादर जी का एक बहोत ही छोटा स्वरुप जिसे गुरु ग्रन्थ साहिब माना जाता है उसके साथ गुरुतेग बहादर जी की और उनके परिवार की बहोत सारी निशानियों और उनके भव्य प्रकाश जहाँ भी हुआ था उसे छत्तीसगढ़ में दर्शन कराया जा रहा है.

अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा ने बताया कि इस यात्रा में पुरे प्रदेश के सिखों का समावेश है. हर जगह इस संदेश यात्रा का बड़े ही जोर-शोर से स्वागत किया जा रहा है. हर जगह कीर्तन, कथा वाचन किया जा रहा है. उन्होंने के कहा कि इस यात्रा के माध्यम से लोगों को एकजुटता, त्याग और बलिदान जो सिखों ने किया है, धर्म को बचाने का काम जो सिखों ने किया है. उसका संदेश धर्म और जातिवाद से ऊपर उठकर सभी समाज के लोगों को एकजुट होकर रहने का काम हम लोगों को करना चाहिए. जातिवाद और धर्मवाद के विवाद में ना पड़कर के सभी समाज हिन्दू, मुश्लिम, सिख, इसाई और सभी समाज के लोगों को एक होकर विकास के बारें में सोचना चाहिए, यदि सभी एक होकर विकास के बारें में सोचेंगे तो निश्चित ही इस देश का विकास होगा.

आपको बता दें कि इस सन्देश यात्रा में विश्व के सबसे छोटे गुरुग्रंथ साहिब जो कि वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है उसके दर्शन कराए जा रहे हैं. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के छोटा स्वरूप मात्र 1 इंच का है. यह स्वरूप 112 साल पुराना है. इस स्वरूप की लंबाई एक इंच, चौड़ाई एक इंच और मोटाई पौन इंच है. इन्हें सोने की पालकी में विराजमान कराकर दर्शन कराए जाते हैं, अन्य दिनों में इन्हें चांदी की डिब्बी में विराजमान किया जाता है. इसे पढ़ने के लिए लैंस भी रखा जाता है. इसमें 1430 अंग यानी पृष्ठ हैं. इस स्वरूप में सोने, नीलम, माणिक, पुखराज समेत सात रत्नों की स्याही से बाणी लिखी गई है. हर पन्ने पर माणिक की स्याही से बार्डर भी बना हुआ है.

इसके साथ ही श्री गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा. हस्तलिखित पाठन हुकुमनामा, चादर श्री साहिब किरपान, दुसहरा

श्री गुरु गोविंद सिंह जी के उपयोग किये हुए पुराने बर्तन, दमोदारी महल की पीढ़ा.

माता सुंदर कौर जी का खडावा, पावन हुकुमनामा है.






अन्य सम्बंधित खबरें