बसना : सचिव पर 50,000 जुर्माना और कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही का आदेश।
बसना। सूचना का अधिकार का उद्वेश्य शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन से है। लेकिन जनसूचना अधिकारी जानबुझकर अपने कतर्व्यनिष्ठा में चूक करने के साथ छ.ग. राज्य सूचना आयोग में मिथ्या जानकारी भी प्रस्तुत करने में संकोच नही कर रहे है। मुख्य सूचना आयुक्त ने सचिव ग्राम पंचायत बिजेमाल को 50,000 रूपए जुर्माना का आदेश पारित कर सीईओ जिला पंचायत महासमुन्द को सचिव मुरलीधर साव के विरूद्व जांच करके कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की अनुशंसा किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत बिजेमाल जपं पिथौरा से 19 जुलाई 2018 को दो अलग अलग सूचना आवेदन लगाकर चौदहवें वित्त योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण)से संबंधित सूचना दस्तावेज की मांग किया। समय सीमा में सूचना उपलब्ध नही कराने पर आवेदक ने 13 सितम्बर 2018 को सीईओ जनपद पंचायत पिथौरा में प्रथम अपील किया। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने प्रथम अपील सुनवाई में आवेदक को निःशुल्क सूचना दस्तावेज प्रदाय कराने का 02 नवम्बर 2018 को आदेश पारित किया।
जनसूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यशैली से क्षुब्ध होकर आवेदक ने छत्तीसगढ राज्य सूचना आयोग में दिनांक 10 दिसम्बर 2018 को द्वितीय अपील दायर किया। मुख्य सूचना आयुक्त एम. के. राउत ने उक्त दोनो प्रकरण में दिनांक 30 मार्च 2022 को सुनवाई में पाया कि अपीलार्थी को समयसीमा में सूचना उपलब्ध नही कराया गया। जो सूचना का अधिकार अधिनियम के विपरीत है। इसलिए धारा 20(1) के तहत पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये का जुर्माना कराने का आदेश पारित किया। मुख्य कायर्पालन अधिकारी जनपद पंचायत पिथौरा को दोनो प्रकरण में 25,000-25000 जुर्माना राशि जनसूचना अधिकारी मुरलीधर साव के वेतन से वसूल करके नियमानुसार शासकीय कोष में जमा कराये जाने हेतु निर्देर्शित किया है।
छ.ग. राज्य सूचना आयोग में सचिव मुरलीधर साव ने बताया कि उसे प्रथम अपीलीय अधिकारी जपं पिथौरा से प्रथम अपील की सुनवाई एवं पारित आदेश पत्र प्राप्त नही हुआ है। मुख्य सूचना आयुक्त ने इसे गंभीरता से संज्ञान लेकर सीईओ पिथौरा को इस संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया। 24 नवंबर 2021 को सूचना आयोग में सीईओ जपं पिथौरा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है कि मुरलीधर साव ने 02 नवम्बर 2018 को आदेश पत्र प्राप्त प्राप्त किया है और उस पावती में सचिव का हस्ताक्षर भी है।
मुख्य सूचना आयुक्त एम.के.राउत ने प्रस्तुत दस्तावजो का निरीक्षण परीक्षण कर पाया कि सचिव द्वारा प्रथम अपील आदेश का पालना नही करने और सूचना आयोग में मिथ्या कथन किया है कि प्रथम अपील पारित आदेश उसे प्राप्त नही हुआ है। इसलिए धारा 20(2) के तहत सीईओ जिला पंचायत महासमुन्द को सचिव मुरलीधर साव के विरूद्व जांच करके सेवा शर्तों के अधीन कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का अनुशंसा किया है।