सरायपाली-बसना : बसों पर नहीं लगी किराया सूची, मनमाना वसूल रहे किराया... क्या परिवहन विभाग ने दी है नियमों के धज्जियाँ उड़ाने की छूट ?
बस चालकों की मनमाना वसूली इन दिनों लोगों के गले नहीं उतर रहा. जिसके चलते लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ रही है. बसों में बेखौफ होकर मनमाना वसूली कर रहे परिचालक को देखकर लगता है कि इन्हें परिवहन विभाग से छूट मिली हुई है. या फिर अवैध वसूली को लेकर परिवहन विभाग और यात्री बसें सांठगांठ कर चुकी है. जिससे इन बसों में सफर करने वाला गरीब, बेबश, लाचार और मजबूर है उसकी सुनने वाला कोई भी नहीं.
नियम विरुद्ध व्यवसायिक माल का परिवहन करने एवं मनमाना किराया वसूली करने वाले इन बसों पर परिवहन विभाग कहीं भी लगाम कसते हुए नजर नहीं आ रहा है. जिससे इन निजी बस कंपनियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं.
बात करते हैं राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा नजर अंदाज किये जाने वाले सरायपाली और बसना ब्लाक की, जहाँ के आम नागरिकों के साथ विगत कई वर्षों से विकास के नाम पर धोखा दिया जा रहा है. इस क्षेत्र के लोगों के पास ना ही रेल की सुविधा है, और ना ही मांग के अनुरूप आज तक इसे जिला बनाया गया है. यहाँ तक कि जन के मुद्दों की बात ना तो विपक्ष करता है. और ना ही क्षेत्र की परेशानी स्थानीय विधायक देखते हैं. जिसके चलते इस क्षेत्र में चलने वाली बसें अपने मनमर्जी से स्थानीय लोगों से किराया वसूलती है. यदि कोई बस में इसके ख़िलाफ आवाज उठता है तो उसे उतारने की धमकी दी जाती है, यहाँ तक कि कई बार यात्रियों को उतार दिया जाता है.
सरायपाली बसना क्षेत्र में चलने वाली बसों में ना ही किराया सूची लगाई गई है. और ना ही सही ढंग से यात्रियों को टिकट दिया जाता है. किराया सूची नहीं होने से बसना से रायपुर जाने का किराया कितना देना होगा यह भी इस क्षेत्र के लोगों को नहीं पता. कभी 160, कभी 180 तो कभी 300 रुपये तक यात्रियों से किराया वसूल लिया जाता है.
आपको बता दें कि यात्रियों को टिकट न होने पर कोई दुर्घटना के दौरान यात्रियों के पास साक्ष्य के रूप मे भी कुछ नही रहता कि वह किस बस मे सफर कर रहे थे.
क्षेत्र के लोगों के पास बस के आलावा दूसरी रेल जैसी सुविधा नहीं होने से मनमाना रकम बस परिचालकों को देना पड़ता है.
यहाँ से गुजरने वाले किसी भी बसों में किराया सूची नहीं लगाई गई है. अधिकांश बसों में नियमानुसार फस्ट एडबॉक्स भी नहीं है. कुछ बसों में तो आपातकाल दरवाजा भी दिखाई नहीं देता और ना ही आग से बचने का कोई साधन दिखाई देता है.
बहरहाल इस क्षेत्र के लोग भगवान भरोसे इन बसों पर यात्रा कर रहे हैं. और पूरा परिवहन विभाग आँख मूंदे बैठा है.