बसना : सरपंच बने मोहरा, सचिव के साथ मिलकर कोई और चला रहा गाँव में सरपंची ?
हेमन्त वैष्णव. बसना जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रंगमटिया के सरपंच निर्वाचित होकर इस पद पर चुने गए हैं, लेकिन वे इस पद से जुड़ा कोई भी कार्य करते नजर नही आते. गाँव के सरपंच का एकदम ही सीधा सरल स्वाभाव है. जिसका हर कोई फायदा उठा रहा है. ख़ासकर गाँव में राजनीती करने वाले, अन्य पंच इसका फायदा उठा रहे हैं.
कहा जाय तो सरपंच केवल इस पद के लिए एक मोहरा बन चुके हैं, जिसका उपयोग गाँव के सचिव और अन्य पंच कर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं. वहीं सरपंच इन सब से दूर एक आम ग्रामीण की जिंदगी बिता रहे हैं सरपंच का गाँव में एक छोटा सा खपरीला घर है. इस समय सुबह अपने पत्नी के साथ तेंदुपत्ता तोड़ने जाते हैं और उसी से अपनी रोजी रोटी का गुजरा करते हैं.
बताया जाता है कि रंगमटिया के सरपंच के भाई किसी उच्च शासकीय पद पर पदस्थ हैं, जिन्हें देखकर और सरपंच के सीधा सरल व्यक्तित्व को देखकर ग्रामीण अपने विकास के लिए इन्हें चुना था. लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को ना मिलकर अन्य लोगों को मिल रहा है. गाँव का विकास कार्य अधुरा है, भ्रष्टाचार कर कुछ लोग अपने फायदे के लिए रकम निकाल रहे हैं.
विगत दिनों इस गाँव में सामुदायिक शौचालय में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अधूरे शौचालय को लेकर खबर प्रकाशित किया गया था. जिसे जिला पंचायत सीईओ द्वारा तत्काल संज्ञान में लेते हुए मौका स्थल का निरिक्षण करते हुए सरपंच को 7 दिवस में कार्य पूरा करने कहा था, अन्यथा सरपंच को बर्खास्त करने की बात कही गई थी.
7 दिवस के भीतर सरपंच द्वारा कार्य पूरा करने की बात कही गई थी. लेकिन 7 दिवस के भीतर शौचालय का कार्य पूरा नहीं हो पाया, अभी भी यहाँ कार्य चल रहा है. लेकिन बर्खास्त करने की चेतावनी देने के बाद भी सरपंच कार्य में अपनी रूचि नहीं दिखाते हैं. अपनी निजी जिंदगी का आनंद उठाते हैं.
सचिव ने बताया कि सरपंच सामुदायिक शौचालय में चल रहे कार्यों को देखने भी नहीं आते, निर्माण कार्य में लगने वाले मिस्त्री मजदूर सब सचिव को ढूंढ़कर लाना पड़ता है. सचिव ढूंढ़कर ना लाये भी तो कैसे नोटीस तो सचिव के नाम से भी जारी किया गया है.
गाँव के हालात देखने पर लगता है कि सरपंच कोई है और सरपंची चला कोई रहा है. सरपंच मात्र मोहरा बन चुके हैं.
इस गाँव में जाने पर पता चला कि यहाँ केवल सामुदायिक शौचालय में ही भ्रष्टाचार नहीं हुआ है. बल्कि रंगमंच, आंगनबाड़ी, विद्यालय के शौचालय भी अधूरे पड़े हैं. गाँव में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर पैसा निकाल लिया गया है. लेकिन लगा एक भी नहीं है.