महासमुंद : तेंदूपत्ता बना ग्रामीणों के आजीविका का साधन, 75 समितियों में हो रहा संग्रहण कार्य
महासमुंद। जिले मे लघु वनोपज समिति के 75 समितियों में तेंदूपत्ता खरीदी की जा रही है। पहले दिन से ही संग्राहक बड़ी संख्या में केंद्रों में पहुंचकर तेंदूपत्ता की बिक्री कर रहे हैं। ग्रामीण आजीविका संवर्धन में तेंदूपत्ता संग्रहण मददगार साबित होता है, बता दें कि प्रत्येक वर्ष तेंदूपत्ता की खरीदी की जाती है।
विभागीय खरीदी के अलावा कई केंद्रों का ठेका भी होता है। गर्मी के दिनों में सुबह से गांव वाले तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल चले जाते हैं। तेज धूप होने से पहले घर वापस लौट कर परिवार के सभी सदस्य मिलकर निर्धारित पत्तों की संख्या की गिनती कर उसकी गड्डी बनाते हैं। दोपहर बाद तेंदूपत्ता की बिक्री करने केंद्रों में पहुंचते हैं।
तेंदूपत्ता संग्राहको के लिए शासन द्वारा भी कई सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इस साल अभी तक तेंदूपत्ता की गुणवत्ता ठीक है। मौसम का मिजाज नहीं बिगड़ा तो ग्राहकों को इस साल ज्यादा लाभ होगा। बहरहाल तेंदूपत्ता ग्रामीण इलाकों और वन क्षेत्रों में निवासरत लोगों के आजीविका का प्रमुख साधन बना हुआ है। हम आपको बता दें कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को पत्ता संग्रहण से जहां रोजगार मिल रहा है और यह उनकी प्रमुख आय का साधन बना हुआ है ।