महासमुंद : मानसून से पहले प्रशासन का अलर्ट, कलेक्टर ने बाढ़ आपदा प्रबंधक की ली बैठक, दिए यह निर्देश
जिले में 39 गांव बाढ़ प्रभावित गांवों में आते है
प्रदेश सहित महासमुंद जिले में 10 से 15 जून के बीच मानसून के प्रवेश का अनुमान
महासमुंद। प्रदेश सहित महासमुंद जिले में 10 से 15 जून के बीच मानसून के प्रवेश का अनुमान मौसम वैज्ञानिकों के द्वारा बताया जा रहा है, साथ ही इस बार मानसून में अच्छी बारिश होने की भी चेतावनी है। ऐसे में उन ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, जो या तो नदी किनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निवास करते हैं या फिर डुबान एरिया में आते हैं। मानसून को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट पर है।
महासमुंद कलेक्टर ने मानसून को देखते हुए बाढ़ आपदा प्रबंधन की बैठक लेकर तमाम विभागों को अपनी-अपनी तैयारी रखने के निर्देश दिए है। बाढ़ आपदा प्रबंधन की नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर नेहा भेड़िया बताती है कि, गत वर्ष जिले में 79 गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल थे। लेकिन पुल पुलिया निर्माण के बाद अब यह आंकड़ा जिले में 39 हो गया है। जिले के 39 गांव बाढ़ दुकान क्षेत्र में आते हैं। ज्यादातर गांव नदी के किनारे बसे हुए है, ऐसे गांव को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यदि आपात स्थिति निर्मित होती है जिला प्रशासन उसके लिए बैकअप प्लान भी लेकर चल रहा है। साथ ही जिला कार्यालय सहित तहसील कार्यालय में कंट्रोलरूम की स्थापना के साथ कोई आपदा की स्थित निर्मित होती है तो रेवेन्यू अधिकारी और एसडीएम को अलर्ट रहने निर्देशित किया गया है।
आपको बता दें कि जिले में 39 गांव बाढ़ प्रभावित गांवों में आते है। जिनमें महासमुंद ब्लॉक में महानदी, सुखानाला और कोडार बांध से प्रभावित 17 गांव है। बागबाहरा ब्लॉक में जोक नदी से प्रभावित 8 गांव आते है। पिथौरा ब्लॉक में भी जोंक नदी के अंतर्गत 6 गांव चिन्हांकित है। बसना ब्लॉक में एक भी गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में शामिल नहीं तो वहीं ब्लॉक में लाथ नाला, खुण्टी नाला, सुरंगी नाला, कटंगी नाला और खोल्टी नाला के अंतर्गत 7 गांव चिन्हांकित है। मानसून में तेज बारिश होने के कारण और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण इन गांवों के नदी नाले उफान पर होते है। जिसके चलते इन गांवों को मुख्य मार्गों से कटना पड़ जाता है। बहरहाल देखना यह होगा कि आखिर प्रशासन मानसून के पहले तो तमाम दावे कर रही आखिर बरसात में इन गांवों की स्थित क्या होती है।