बसना : सरस्वती शिशु मंदिर में मनाया गया हरियाली पर्व
किसी भी क्षेत्र में संस्कृति के विकास में स्थानीय त्योहारों का विशेष योगदान होता है | यह संस्कृति को जीवंत स्वरूप प्रदान करता है | पर्वों के दृष्टि से छत्तीसगढ़ वर्ष के 12 महीने कोई न कोई पर्व मनाता रहता है जो यहां की सांस्कृतिक भाव को उल्लासित करते रहते हैं | 
यह छत्तीसगढ़ क्षेत्र में प्रथम पर्व के रूप में अत्यधिक उल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है | हरेली मुख्य रूप से हरियाली का प्रतीक है जिसे छत्तीसगढ़ का किसान बड़े उत्साह से मनाते हैं यह पर्व श्रावण मास की अवश्य तिथि को मनाया जाता है.
यह दिन तंत्र साधना जादू टोना करने वाले बुरी शक्तियों के गहरे विश्वास से भी जुड़ा है | श्रावण मास में कृषक खेती कार्य को पूर्ण कर खेती में काम आने वाले समस्त औजारों की पूजा कर कृतग्यता ज्ञापित करते हैं | इस संस्कृति को भावी पीढ़ी को अवगत कराने के लिए विद्यालय में औजारों का पूजन पूर्व प्राचार्य श्री रमेश कर एवं प्राचार्य श्री नंदू राम निर्मलकर के कर कमलों से संपन्न किया गया | छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेल फुगडी, गेड़ी, जलेबी दौड़, बोरा दौड़, रस्सी कूद, आदि करवाया गया | प्रधानाचार्य श्री भरोस राम साव ने हरियाली पर्व के महत्ता से अवगत कराया एवं बधाई दी |