भाजपा नेता अजय के बयान का छत्तीसगढ़ में होने लगा चौतरफा विरोध, समग्र आदिवासी समाज नाराज
पूर्व मंत्री अजय अपने बयान के लिए समाज से मांगे माफी, नहीं तो कुरूद के साथ पूरे प्रदेश में होगा विरोध प्रदर्शन - दीवान
आदिवासी नेता दीवान ने कहा- सत्ता के साथ-साथ अजय के दिमाग का भी हो गया हास
कहा- समाज की मांग पर राज्य सरकार ने दी अवकाश की मंजूरी, आपकी भी सरकार थी 15 साल पर आपने आदिवासी के हितों को क्यो किया नजरअंदाज
सिंधुघाटी की सभ्यता से जुड़ी है आदिवासी की संस्कृति और सभ्यता
महासमुंद/ रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के बीते काल के मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा आदिवासी आज और उनके द्वारा मनाई जाने वाली विश्वादिवासी दिवस पर की गई टिप्पणी से आज छत्तीसगढ़ के समग्र आदिवासी समाज नाराज है। उनके इस बयान का पूरे प्रदेश में विरोध शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के महासचिव व महासमुंद तथा गरियाबंद जिले के प्रभारी व आदिवासी किसान नेता संतोष दीवान ने कहा कि गुजरे जमाने के मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा आदिवासी समाज व उनके द्वारा मनाई जाने वाली विश्व आदिवासी दिवस पर की गई टिप्पणी से आज पूरा आदिवासी समाज नाराज है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में 15 साल तक भाजपा की सरकार थी, भाजपा व उनके नेताओ ने आदिवासी समाज के हितों को क्यो ध्यान में रखकर क्यो समाज हित मे निर्णय नही लिए। आदिवासी नेता दीवान ने कहा कि, अजय चंद्राकार अपने दल के सबसे जिम्मेदार नेता है, इसलिए किसी भी समाज के बारे में बहुत सोच कर बोलना चाहिए। लगता है सत्ता के साथ- साथ भाजपा नेता अजय चंद्राकार के दिमाग का भी हास् हो गया है।
दीवान ने कहा कि आदिवासी समाज के मांग पर निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय अवकाश का फैसला लिया गया है। इस फैसले से पूरा राज्य के निवासरत आदिवासी समाज अपने संस्कृति और रीतिरिवाजों के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाता है। इससे समाज के नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और रीतिरिवाजों को देखने, समझने और जुड़ने का अवसर मिलता है। दीवान ने कहा कि चंद्राकार द्वारा इस अवकाश की महज सरकारी छुट्टी करार देना उनके मानसिक हास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चन्द्राकार आदिवासी समाज व विश्व आदिवासी दिवस पर विधानसभा में दिए गए बयान व टिप्पणी के लिए पूरे आदिवासी समाज से मांगी मांगनी चाहिए, नही उनके घर कुरूद और पूरे प्रदेश में चंद्राकार का विरोध किया जाएगा।
दीवान ने कहा कि मूल रूप से आदिवासियों का अपना धर्म है। ये भगवान शिव एवं भैरव के साथ ही प्रकृति पूजक हैं। साथ ही जंगल, पहाड़, नदियों एवं सूर्य की आराधना करते हैं। इनके अपने अलग लोक देवता, ग्राम देवता और कुल देवता हैं। जैसे नागवंशी आदिवासी और उनकी उप जनजातियां नाग की पूजा करते हैं। सिंधु घाटी की सभ्यता में शिव जैसी पशुओं से घिरी जो मूर्ति मिली है इससे यह सिद्ध होता है कि आदिवासियों का संबंध सिंधु घाटी की सभ्यता से भी था।