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बसना : जिसके नाम में योजना के साथ जोड़ा न्याय, उसी के साथ अन्याय ! सड़कों पर हो रही तड़प-तड़प कर मौत..... अधूरे गौठान का जिम्मेदार कौन ?

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई गोधन न्याय योजना की चर्चा पुरे देश में हैं. गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की इकलौती ऐसी योजना है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के गोठानों में दो रुपये किलो की दर से गोबर तथा चार रुपये लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की बात कही जा रही है.

इस योजना पर सरकार को इतना भरोसा है कि मार्च 2022 में पहली बार गोधन से बने ब्रीफकेस में छत्तीसगढ़ का बजट पेश किया गया. जिसके बाद फिर एक बार देश विदेश में इसकी चर्चा होने लगी. मगर जो चर्चा पुरे देश के साथ विदेशों में सुनाई पड़ रही है. वह बसना विकासखंड में सच होती दिखाई नहीं दे रही है.


सरकार ने जिसके नाम के साथ योजना में न्याय जोड़ा है, बसना विकासखंड में उसी के साथ अन्याय हो रहा है. प्रतिदिन सड़कों में गोधन तड़प-तड़प कर अपने प्राण गवां रही है. उन्हें बचाने ना तो गौठान काम आ रहे हैं ना ही रोका छेका अभियान.

आखिर इन सबके लिए जिम्मेदार कौन है शासन या फिर प्रशासन ? सरकार ने योजना लाई, अब दूध से लेकर गौबर गौमूत्र तक ख़रीदे जाने लगे, पशुओं को रखने के लिए गौठान है, फिर भी गाय आवारा पशुओं की सड़कों पर घूम रही है. जिससे की दुर्घटना अधिक और लोगों  को योजना का लाभ कम मिलता हुआ दिखाई पड़ता है. अगर पूरी तरह किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो वह गोधन है जिससे साथ न्याय योजना जोड़ा गया है.

योजना को शुरू हुए 3 वर्ष से भी अधिक समय होने के बाद इन पशुओं के साथ ऐसा अन्याय नहीं होता, यदि अधिकारी ठीक तरह से अपनी जिम्मेदारी निभाते, लेकिन अगर अधिकारी केवल खानापूर्ति और अपनी जिम्मेदारी से भागने वाला हो तो यही हाल होगा.


बात करते हैं बसना जनपद के सबसे समीप स्थित ग्राम पंचायत अरेकेल के गौठान की, जहाँ गौठान का निर्माण केवल खानापूर्ति के लिए किया गया है. जनपद कार्यालय के एकदम समीप होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारीयों को यहाँ हुए भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं हुई. वर्तमान में इस गौठान में किसी तरह का कार्य नहीं हो रहा है.

इस गौठान में भ्रष्टाचार की झलक गौठान के गेट को देखने पर ही हो जाएगी, जहाँ ना तार घेराव किया गया, ना बाउंड्रीवाल फिर भी गेट बना दिया गया. इस गौठान में ना तो गाय रह सकती है. ना किसी प्रकार का कार्य किया जा सकता है. गौठान के दोनों तरफ तालाब है. और सभी ओर से खुला है.

जिस गाँव का का सरपंच ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं कर पा रहा, मांग लेकर पहुंचे ग्रामीणों की शिकायत पुलिस से की जा रही हो, वहां तो गौठान की व्यवस्था को लेकर अपेक्षा ही नहीं करनी चाहिए. वैसे आरक्षण के चलते इस गाँव में एक महिला सरपंच है लेकिन पंचायत के कार्यों में उसके पति की दखलंदाजी शत प्रतिशत रहती है.

वहीँ अरेकेल के सचिव इस गौठान को पूर्ण बताते हैं.


यही हाल अरेकेल के समीप ग्राम पंचायत कुड़ेकेल का है, यहाँ स्थिति ऐसी है कि सुचना पटल पर जानकारी ही गलत दे दी गई है. अधूरे गौठान को देखकर जब सुचना पटल पर लिखे इंजिनियर को संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वह किसी और का नंबर निकला. साथ ही लोकपाल अधिकारी का नाम भी गलत अंकित किया गया है. इसे देककर अंदाजा लगाया जा सकता हा कि अधिकारी किस तरह का कार्य कर रहे हैं. जिसके चलते बसना विकासखंड में यह योजना फ्लॉप होती नजर आ रही है.


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