बसना : मरणासन्न स्थिति में गोधन को लेकर नगर पंचायत पहुंचे गौ... - CG Sandesh

बसना : मरणासन्न स्थिति में गोधन को लेकर नगर पंचायत पहुंचे गौसेवक, दरवाजे पर रखकर मांग रहे न्याय, प्रदर्शन का आज दूसरा दिन.

बसना नगर पंचायत क्षेत्र में आये दिन गोधन हादसे के शिकार हो रहे हैं. गोधन को लेकर तमाम योजना होने के बावजूद सड़कों पर आये दिन इनकी मौत हो रही है. वहीं जिम्मेदार इससे दूर भाग रहे हैं. आरोप है कि गोधन के अंतिम संस्कार के नाम पर भी फर्जीवाडा कर नगरपंचायत बसना से निकाला गया है. इसके बावजूद ना तो पंचयत गोधन का अंतिम संस्कार करता है और ना ही दुर्घटना ग्रस्त गोधन को सुरक्षित स्थान पहुंचता हैं.

वहीं बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर ने सड़कों पर खुले में विचरण करने वाले मवेशी बैठे या घूमते पाये जाने पर संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय निकाय के अन्तर्गत नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध कार्यवाही की चेतावनी दी है. जबकि नगरपंचायत बसना क्षेत्र की सड़कों में आये दिन पशुओं का जमावड़ा रहता है. शायद महासमुंद जिले में अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है.

जिसके चलते आये दिन बसना नगर की सड़कों में पशुओं का जमावड़ा रहता है. और कोई ना कोई हादसा हो जाता है. गुरूवार को भी बसना नगर के जगदीशपुर रोड में एक गाय दुर्घटना से बुरी तरह से घायल हो गया. और इसके बाद वह चलने में असमर्थ हो गया. इसकी जानकारी सुबह 10 बजे नगर पंचायत बसना को दी गई. लेकिन 2 बजे तक नगर पंचायत के कर्मचारी गाय को लेने नहीं पहुंचे वह रोड में पड़ी रही जिसे देखकर कुत्ते उसे नोचने लगे.

इसके बाद  गौसेवक आक्रोशित हो गए और घायल गोधन को लेकर नगर पंचायत बसना के कार्यालय पहुंचे और कल दोपहर से लगातार नगर पंचायत के आगे गोधन को रखकर प्रदर्शन जारी है. वर्त्तमान में गोधन मरणासन्न स्थिती में है ना ही कुछ खा रही ना ही पानी पी रही.

वहीं गौसेवक महेंद्र साव ने बताया कि विगत 2 माह से नगर पंचायत बसना क्षेत्र के अंतर्गत 22 गोवंश की मृत्यु हो चुकी है. जिसका अंतिम संस्कार नगर पंचायत बसना की जगह स्थानीय गौसेवक कर रहे हैं. जबकि नगर पंचायत बसना द्वारा हजारों रुपये गोवंश के अंतिम संस्कार के नामपर निकाला गया है.

मोहन सोनवानी ने बताया कि नगर पंचायत बसना तालाबंदी की कागार पर है. अधिकारी कभी समय पर नहीं मिलते अगर कभी 20 दिन के अंतराल में मिल भी जाए तो उनके पास आम जनता के लिए समय नहीं होता. केवल दस्तखत करने आते हैं.  


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