नई गाड़ी खरीदने के लिए कार लोन लें या पर्सनल लोन?
पर्सनल लोन और कार लोन में क्या है फर्क
पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loan) है. जबकि कार लोन एक सिक्योर्ड लोन (secured loan) है. कार लोन में आपकी कार बैंक के पास तब तक गिरवी रहती है जब तक आप उस लोन को पूरी तरह चुका नहीं देते हैं. पर्सनल लोन देते समय कोई भी वित्तीय संस्थान अप्लाई करने वाले शख्स की मासिक आय और क्रेडिट स्कोर जैसी बातों पर ध्यान देता है, जबकि कार लोन देते समय इन बातों के अलावा व्हीकल की कीमत पर भी गौर किया जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर आपने 15 लाख रुपये की कार खरीदना चाहते हैं, तो बैंक इस कीमत के 80-90 फीसदी के बराबर लोन आसानी से दे सकते हैं, बशर्ते आपके पास ईएमआई चुकाने की क्षमता हो. कई बैंक तो कार की कीमत के 100 फीसदी तक लोन भी दे देते हैं. लेकिन अगर आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं तो बैंक या वित्तीय संस्था के पास सिक्योरिटी के तौर पर कुछ नहीं होता. उन्हें सिर्फ आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और लोन चुकाने की क्षमता यानी आमदनी को देखकर ही लोन देना होता है.
अगर आप कार लोन लेकर नई गाड़ी खरीदते हैं तो वह कार तब तक पूरी तरह आपकी नहीं होती जब तक आप लोन की पूरी रकम चुका नहीं देते हैं. यानी लोन पूरा होने तक कार का मालिकाना हक उस वित्तीय संस्थान के पास होता है, जिससे आप लोन लेते हैं. नई कार के दस्तावेज बैंक या वित्तीय संस्थान के पास गिरवी रखे होते हैं. अगर आप तय अवधि के भीतर लोन नहीं चुकाते तो बैंक या वित्तीय संस्थान आपकी कार को नीलामी कर अपना पैसा वसूल सकते हैं. वहीं पर्सनल लोन के लिए कार, प्रॉपर्टी, कीमती ज्वैलरी को गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके लिए आपकी मंथली इनकम और क्रेडिट स्कोर का ठीक रहना जरूरी है.
पर्सनल लोन के मुकाबले सस्ते होते हैं कार लोन है सस्ता
ज्यादातर वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन पर ज्यादा ब्याज लेते हैं. इसके मुकाबले कार लोन पर ब्याज दर कम होती है. जबकि पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होने के कारण महंगा होता है. इन दोनों में से किसी भी लोन के लिए अप्लाई करने से पहले ब्याज दरों की तुलना कर लेनी चाहिए. साथ ही संबंधित नियमों और शर्तों को भी अच्छी तरह से जान लेना चाहिए. पर्सनल लोन और कार लोन की ब्याज दरों और EMI की आपस में तुलना करके आप सही फैसला ले सकते हैं.