क्या कहता है बसना विधानसभा का चुनावी समीकरण ?
जैसे-जैसे चुनाव समीप आते जा रहे हैं वैसे ही बसना विधानसभा का चुनावी समीकरण तेजी से बदलने लगा है. चुनावी समीकरण कब कैसे किसके पक्ष में चला जाए यह कहना मुश्किल है. वर्त्तमान में बसना विधानसभा में नीलांचल सेवा समिति के संस्थापक की बीजेपी में वापसी आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है. हलाकि चुनावी समीकरण बदलने में देरी नहीं लगती.
विगत विधानसभा चुनाव में संपत अग्रवाल के निर्दलीय चुनाव लड़ने से बीजेपी तीसरे स्थान पर आ गई थी, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी देवेन्द्र बहादुर सिंह की जीत हुई थी. इसके बाद डॉ. संपत अग्रवाल की बीजेपी में वापसी ना होने से उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने की उम्मीद थी. जिससे एक बार फिर निश्चित तौर पर फायदा कहीं ना कहीं कांग्रेस को मिल सकता था. लेकिन संपत अग्रवाल के बीजेपी में वापसी होने से इस बार चुनाव त्रिकोणीय नही बल्कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होने के आसार हैं.
जहाँ एक तरफ राज्य में कांग्रेस की सत्ता आने के बावजूद बसना विधानसभा में कांग्रेस से जुड़े नेता तवज्जो नही मिलने से पार्टी से दूर होते चले गए, जिन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कभी मनाने की कोशिश नहीं की वहीं दूसरी तरफ संपत अग्रवाल अपने के साथ विशाल जनसमूह में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी जोड़ते चले गए.
विगत विधानसभा चुनाव में जहाँ कांग्रेस का टिकट वर्त्तमान विधायक देवेन्द्र बहादुर को मिलने को लेकर संशय था, वहीं इस बार बसना विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में केवल एक नाम राजा देवेन्द्र बहादुर का ही सामने आ रहा है. इस बार बसना विधानसभा से कांग्रेस के टिकट को लेकर कोई प्रतिस्पर्धा ही नहीं है. कारण, कार्यकर्ताओं का टोटा होने के बावजूद अपनी छवि और व्यक्तित्व के चलते देवेन्द्र बहादुर सिंह को जीत मिली थी. कई लोगों का मानना है कि देवेन्द्र बहादुर सिंह के नाम पर ही वोटों की गिनती 50 हजार से शुरू होती है. लेकिन अगर मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच हो तो कांग्रेस को जमीनी स्तर पर और अधिक मेहनत करने की जरुरत है.
वहीं संपत अग्रवाल के बीजेपी में वापसी होने से टिकट मिलने को लेकर अब भी प्रश्न चिन्ह बना हुआ है, बसना विधानसभा से भाजपा जिला अध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी भी टिकट की प्रमुख दावेदारों में सबसे आगे है. रूपकुमारी चौधरी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में राजा देवेन्द्र बहादुर सिंह को मात दी थी, और अपने विधायकी में जनसंपर्क को लेकर लोकप्रिय भी रही.
बसना विधानसभा में बीजेपी के टिकट को लेकर वर्त्तमान में दो लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है. जिसमे संपत अग्रवाल और रूपकुमारी चौधरी का नाम सामने आ रहा है. और अब एक ही पार्टी में होने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच जो एक दसरे का पैर खींचने वाला काम चल रह है वह जग जाहिर है.
24 सितम्बर को बीजेपी का गंगाजल के सम्मान में भाजपा मैदान में का कार्यक्रम महासमुंद में था, जहाँ संपत को मंच में जगह नही मिलने से अख़बारों में कार्यक्रम के साथ इसे भी जगह दी गई लेकिन, बीजेपी के कार्यक्रम की बजाय संपत अग्रवाल को मंच में जगह नहीं देने की चर्चा अधिक रही.
इसके बाद बसना विधानसभा में संपत अग्रवाल के स्वागत का कार्यक्रम रखा गया था, जहाँ भी रूपकुमारी चौधरी, भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल अग्रवाल दिखाई नही दिए. अनुपस्थिति के बावजूद मंच में इनका नाम स्थान देने के लिए पुकारा गया था. कई लोगों के मन में ऐसी शंका थी की बसना में संपत अग्रवाल की बीजेपी में वापसी के बाद हो रहे कार्यक्रम में रूपकुमारी चौधरी जरुर दिखाई देगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
संपत अग्रवाल ने अपने टिकट को लेकर बीजेपी के वापसी कार्यक्रम में मिडिया से चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी जिसे कमल का फूल देकर भेजेगी उसके पक्ष में ही कार्यकर उसे जिताया जायेगा. संपत अग्रवाल चारों विधानसभा में भाजपा का परचम लहराने की बात कर रहे हैं. अब देखना होगा कि पार्टी किसे टिकट देती है.