प्रदेश में संगठन के माध्यम से हजारों पत्रकार को एकत्रित करने... - CG Sandesh

प्रदेश में संगठन के माध्यम से हजारों पत्रकार को एकत्रित करने वाला हो गया फर्जी पत्रकार!

एक बार फिर फर्जी पत्रकार को लेकर चर्चा होने लगी है. रायपुर के राखी थाना अंतर्गत पुलिस ने बसना क्षेत्र के 4 पत्रकारों को अवैध वसूली के मामले में गिरफ्तार किया है.

आरोप है कि ये पत्रकार एनआरवीपी के सहायक प्रबंधक बेंजामीन सिक्का जो कि पूर्व में कई मामलों का आरोपी है, जिसने पटवारी के पद पर रहते हुए कई शासकीय जमीन का सौदा खुद की जागीर समझकर कर दिया उनसे ये चारों पत्रकार एनआरवीपी कार्यालय में पहुंचकर 2.5 लाख रुपये की उगाही कर रहे थे.

बेंजामिन सिक्का पर 800 नग ऋण पुस्तिका को जमा नहीं करने का आरोप लगाया था, जिसकी प्रथिमिकी स्वयं पिथौरा तहसीलदार ने की थी. जिसपर पिथौरा पुलिस ने मामले के आरोपियों के विरुद्ध धारा 120-B-IPC, 420-IPC, 467-IPC, 468-IPC, 471-IPC के तहत जुर्म दर्ज किया था.

इसके बाद यह तत्कालीन पटवारी बेंजामिन सिक्का कभी फर्जी नहीं हुआ, बल्कि नायब तहसीलदार और अब एनआरवीपी के सहायक प्रबंधक के पद पर पदस्थ है.

वहीं बेंजामिन सिक्का से अवैध वसूली के मामले में एक साप्ताहिक अखबार का संपादक, प्रदेश में संगठन के माध्यम से महासचिव के पद पर रहते हुए हजारों पत्रकार को एकत्रित करने वाला फर्जी हो गया.

हम बात कर रहे हैं रिपोर्टर क्रांति के संपादक सेवकदास दीवान की, जो वर्त्तमान में पत्रकार कल्याण परिषद् संघ के प्रदेश अध्यक्ष और इसके पूर्व छत्तीसगढ़ वेलफेयर यूनियन के महासचिव रहे हैं. छत्तीसगढ़ वेलफेयर यूनियन में महासचिव के पद पर रहते हुए इन्होने प्रदेश में करीब 1 हजार से अधिक पत्रकारों को संगठन के माध्यम से एकत्रित किया था. सभी के लिए प्रेस कार्ड जारी किये थे. तो क्या अब इनके फर्जी हो जाने से इनके द्वारा जारी किये 1 हजार पत्रकारों के प्रेस कार्ड फर्जी हो जायेंगे ?

4 पत्रकारों द्वारा अवैध वसूली की खबर IBC 24 सहित कई न्यूज़ चैनलों, अख़बारों, वेब पोर्टल में चलाई गई. IBC 24 ने तो अपनी ख़बरों में एक तरफ सेवक दास दीवान को रिपोर्टर क्रांति का संपादक बताया गया साथ ही फर्जी पत्रकार भी बता दिया.

खैर IBC 24 की बात छोड़ दें तो सेवक दास दीवान जिस संगठन में पहले प्रदेश महासचिव थे, उसी संगठन के लोग फर्जी पत्रकार की ख़बरों का विरोध करना छोड़ बड़े मजे से उसे शेयर करने में लगे रहे. संगठन यह भूल गया कि जिस पत्रकार को फर्जी कहा जा रहा है वह पत्रकार पहले उसी संगठन का महासचिव था. तो क्या उक्त संगठन ने एक फर्जी पत्रकार को अपने संगठन में जोड़कर उसे प्रदेश महासचिव का पद दिया था? क्या किसी भी संगठन द्वारा जारी किये जाने वाले प्रेस कार्ड फर्जी होते हैं?

IBC 24 सहित कई न्यूज़ चैनलों और अख़बार जिन्होंने सेवक दास दीवान को फर्जी पत्रकार बताया क्या वे चैनल अपने संवाददाता नियुक्त करने के पहले कोई मानदंड निर्धारित करते हैं ताकि उनका संवाददाता कभी फर्जी ना कहलाये?  

निश्चित ही अवैध वसूली करना एक गंभीर अपराध की दृष्टि में आता है, परन्तु किसी तथ्य को जाने समझे बगैर किसी को फर्जी कह देना कहाँ तक उचित है ?


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