फुलझर अंचल में ऑपरेशन सहित गंभीर से गंभीर बिमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों के हॉस्पिटल जैसे सुविधा दे रहा अग्रवाल नर्सिंग होम बसना, ब्रॉन्कोस्कोपी की मदद से 18 माह के बच्चे की साँस नली से निकाला गया सीताफल का बीज.
बसना क्षेत्र में एक 18 माह के बच्चे ने जब सीताफल खाया तो उसका बीज बच्चे की श्वांस नली में जाकर फँस गया. इस बात का एहसास बच्चे के परिजनों को नहीं था. इसके बाद बच्चे को लगातार सर्दी, खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. बच्चे के परिजन उसे गाँव में एक डॉ. के पास ले गए, जिसके पास से परिजन दवाई लेकर आये लेकिन इससे बच्चे के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ और बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गयी जिसे देख उसके परिजन बच्चे को इलाज हेतु अग्रवाल नर्सिंग होम बसना लेकर आये.
बच्चे के परिजनों द्वारा अत्यंत ही गंभीर स्थिति में बच्चे को इलाज हेतु अस्पताल लाया गया था, जहाँ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बच्चे को तुरंत PICU वेंटिलेटर में रखकर इलाज करना प्रारंभ किया. वेंटिलेटर में रखने के बावजूद बच्चे का ऑक्सीजन लेवल 70 प्रतिशत ही था. हालत में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दे रहा था. इसके बाद डॉ. अमित ने बच्चे का एक्स-रे सहित अन्य जाँच करवाया. जिसमे पाया गया कि बच्चे के दायें तरफ का फेफड़ा पूरी तरह से बंद है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल को यह आशंका थी कि बच्चे की सांस नली में खाते समय कुछ फँस गया है. जिसकी वजह से बच्चा इतना गंभीर है. इसके बाद जब बच्चे के परिजनों से जब पूछा गया तो बच्चे के दादा ने बताया कि सीताफल खाते समय उसका बीज बच्चा निगल गया था, शायद वही स्वांस नली में जा फँसा है.
बच्चे की स्वांस नली में फंसे बीज को निकालना इतना आसान नहीं था, 18 माह के बच्चे को बेहोश कर ब्रॉन्कोस्कोपी तकनीक की सहायता से बीज निकालना जोख़िम भरा था, इसके बच्चे की जान को खतरा भी था.
आपातकालीन स्थिति में रायपुर के डॉ. सतीश राठी ENT सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. दयानद होता, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. रश्मी बर्मन एवं नर्सिंग होम के समस्त ओटी, आईसीयू स्टाफ की मदद से सांस नली में 4 दिन से फंसे हुए सीताफल के बीज को ब्रॉन्कोस्कोपी द्वारा कड़ी मेहनत और धैर्य के साथ सफलता पूर्वक ब निकाला गया. इसके बाद बच्चे को साँस लेने की तकलीफ से राहत मिली. और अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है. बच्चे का इलाज केंद्र सरकार की योजना आयुष्मान कार्ड द्वारा किया गया.
अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में जिले का एक मात्र शिशु गहन चिकित्सा केंद्र NICU/PICU है, जहाँ समय से पूर्व जन्म हुए बच्चे और विषम परिस्थितियों में बच्चों को आपातकालीन सेवा दी जाती है. अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में गर्भावस्था से लेकर जन्म हुए बच्चे की देखरेख हेतु सभी तरह की सुविधा उपलब्ध है. इसके लिए क्षेत्र के लोगों को अब बड़े शहरों में जाना नहीं पड़ता. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती अग्रवाल द्वारा यहाँ प्रतिदिन 24*7 सेवाएं दी जा रही है. जहाँ गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज किया जा रहा है और आपतकालीं स्थिति में बच्चे की सांस नली में फसें बीज को निकालकर अस्पताल ने एक और उपलब्धि हासिल की है.
डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि इस जटिल प्रक्रिया में जान का खतरा बहुत ज्यादा होता है. बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है. डॉ. अमित ने बताया कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों को छोटी वस्तुएं जैसे खिलोने, मोती, बीज वाले फल मुगफली नारियल, इत्यादि से दूर रखे और बहुत ही सावधानी पूर्वक खिलाएं और अचानक खांसी, सांस की तकलीफ होने पर इस प्रकार की संभावना रखते हुए अपने बच्चे को शिशु रोग विशेषज्ञ से तत्काल परामर्श हेतु ले जाएँ.
क्षेत्र में विगत 40 वर्षों से भी अधिक समय से स्वास्थ्य सेवा दे रहे डॉ. एन के अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती दौर में क्षेत्र में स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं थी, गंभीर मरीजों के इलाज के लिए कोई भी सुविधा नहीं थी. जिसके बाद उन्होंने सोचा कि यहाँ मरीजों को उच्चस्तर की सेवा देना अति आवश्यक है. और उसके बाद से लगातार अग्रवाल नर्सिंग होम बसना क्षेत्र के लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने में जुटा है. अब बड़े से बड़े बीमारी के इलाज के लिए लोगों को दूर जाना नहीं पड़ता.