कौन हैं शौकीलाल बारीक.. जिनके कहने पर मुख्यमंत्री ने आपकी बा... - CG Sandesh

कौन हैं शौकीलाल बारीक.. जिनके कहने पर मुख्यमंत्री ने आपकी बात सही है कहकर बसना तहसीलदार को तत्काल किया निलंबित.

मंगलवार को बसना विधानसभा के ग्राम पिरदा में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में बसना तहसीलदार का निलंबित होना सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा. शिकायत के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के “फैसला ऑन द स्पॉट” को लोगों ने तालियों की गढ़गढ़ाहट के साथ स्वागत किया.

आखिर ऐसा क्या मामला था जिसे मुख्यमंत्री ने सही कहते हुए बसना तहसीलदार रामप्रसाद बघेल को तत्काल निलंबित कर दिया ? क्या शौकीलाल बारीक़ ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से पहले किसी अन्य अधिकारोयों से नहीं की थी ? अगर की थी तो अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई ? क्या अब तक बसना तहसीलदार को उच्च अधिकारीयों द्वारा आश्रय देकर बचाया जा रहा था ? क्या अब हर किसी को न्याय के लिए भेंट-मुलाकात कार्यक्रम का इंतजार करना होगा ? आखिर कौन हैं शौकीलाल बारीक जिनकी शिकायत पर मुख्यमंत्री ने बसना तहसीलदार को किया तत्काल प्रभाव से निलंबित..

शौकीलाल बारीक बसना तहसील के ग्राम दुधिपाली निवासी हैं, शिक्षक के पद से सेनानिर्वित होने के बाद ग्राम बंसुला में शिक्षा दान कर रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम दुधिपाली में शौकीलाल बारीक के पूर्वजों का एक पुश्तैनी तालाब था, जिसे शौकीलाल बारीक तालाब के रूप में ही रखना चाहते थे, इसलिए शौकीलाल बारीक़ ने इसपर आपत्ति जताते हुए तहसीलदार को तालाब के बंटवारा करने से मना किया. लेकिन फिर भी बसना तहसीलदार राम प्रसाद बघेल ने उस तालाब का बंटवारा कर उसका पट्टा जारी कर दिया. और इसके बाद तहसीलदार ने शौकीलाल बारीक से गलत व्यवहार भी किया, और बदतमीज कहते हुए पुलिस को बुलाकर धारा लगवाने की धमकी भी दी.

इस मामले की शिकायत शौकीलाल बारीक ने उच्च अधिकारीयों से भी की, चंडी दिवस के दौरान ग्राम गढ़फुलझर में आयोजित कोलता समाज के कार्यक्रम इसकी लिखित शिकायत मुख्यमंत्री के नाम शौकीलाल बारीक़ ने दिया था. आयोजित कार्यक्रम के दिन एक राष्ट्रीय समाचार पत्र के स्थानीय पेज में इस मामले को उजागर किया गया था जिस मामले को “फैसला ऑन द स्पॉट” लिया जा सकता था उसे दबा दिया गया.

बावजूद इसके शौकीलाल बारीक ने हार नहीं मानी, जिसकी वजह से किस्मत ने भी उनका साथ दिया. जो न्याय उन्हें कई शिकायत के बाद भी नहीं मिल पाया वह हजारों की भीड़ में मुख्यमंत्री के आयोजित कार्यक्रम भेंट-मुलाकात में मिल गया.

शौकीलाल बारीक ने मुख्यमंत्री से अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार तालाब का बंटवारा कहीं नहीं होता ऐसा मैंने सुना है, जिसके सुनते ही मुख्यमंत्री ने तहसीलदार ने ऐसा किया है कहते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. 


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