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महासमुंद : गाँव-गाँव फैला अवैध महुआ शराब का नेटवर्क, पुलिस की कार्यवाही का नहीं है डर, कार्यवाही से बस भरने लगे हैं FIR के पन्ने.

महासमुंद जिले के कई गाँवों में अवैध महुआ शराब के कारोबार का नेटवर्क फैला हुआ है. पुलिस जो कार्यवाही कर पा रही है वह इस अवैध कारोबार का मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा है. बाकी का कारोबार कहीं गुंडागर्दी की धौंस दिखाकर तो कहीं मंथली डिमांड पूरी करके की जा रही है. जिले में शासकीय शराब दुकान से कितने की शराब बेची जा रही है इसकी जानकारी तो विभाग को है लेकिन एक दिन में जिले भर में कितने रुपयों का अवैध महुआ शराब बेचा जा रहा है इसका शायद ही कोई अनुमान हो.

महासमुंद पुलिस रोजाना आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही कर वाहवाही बटोर रही है, पुलिस की कार्यवाही देखकर लगता है महासमुंद जिले में माह भर में हजारों लीटर महुआ शराब जप्त किया जा रहा है. पुलिस ने कई कार्यवाही ऐसे भी की है जिसमे एक ही कार्यवाही में ही हजार लीटर से अधिक मात्रा में अवैध शराब जप्त किया हो. लेकिन इतनी बड़ी कार्यवाही का क्या फायदा जब महुआ शराब के कारोबारियों को इसका डर ही नहीं. पुलिस कार्यवाही कर बस FIR के पन्ने भर रही हैं, वहीँ अवैध महुआ कारोबारियों को इसका कोई असर होता नहीं दिखाई देता, अगले दिन फिर से उसी जगह अवैध शराब बनने लगती है, और जो लगाम कानून के रक्षक लगाना चाहते हैं, नही लगा पाते. क्या आबकारी एक्ट का बनाया कानून इतना कमजोर है ? जिसमें कार्यवाही तो होती है पर इसका कोई डर भय नहीं रहता.

आबकारी एक्ट के इस कानून का फायदा ना केवल अवैध महुआ शराब कारोबारी उठा रहें हैं बल्कि महकमे में बैठे निम्न से लेकर उच्च अधिकारी भी इसका लाभ ले रहें हैं. महुआ शराब कारोबारियों के साथ मंथली सांठ-गाँठ से लेकर कार्यवाही के दौरान 34(2) को 36(C) भी बनाये जाने के आरोप क्षेत्र में पुलिस पर लगते ही रहे हैं.

आप कभी गौर फरमाईयेगा, किसी भी थाने में नए प्रभारी आने के बाद दो दिन बड़े जोर शोर से कार्यवाही होती है. मानो कि अब नए थाना प्रभारी के आने के बाद महुआ शराब पर पूरी तरह से लगाम कस जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं, अवैध महुआ शराब कारोबारियों का काम कार्यवाही के बाद भी चालू रहता है. क्योकि कार्यवाही के बाद अगर आरोपी को जेल भेज भी दिया जाए तो उसके घर से कोई अन्य व्यक्ति इस अवैध कारोबार को चालू रखता है. कई लोग दुबारा कार्यवाही ना हो इसके लिए सांठगाँठ भी कर लेते हैं. अवैध शराब का यह कारोबार इतना बड़ा हो चूका है कि भारी मात्रा में शराब जप्त किये जाने के बावजूद शराब कोचियों की डिमांड पूरी कर देता है.

कोचियों की डिमांड पूरी करने वाले ये कारोबारी जो महुआ शराब बेचते हैं, वह सेहत के लिए नुकासान देह है, साथ ही जहरीली भी हो सकती है. अवैध महुआ शराब बिकने से स्वास्थ्य और राजस्व दोनों की हानि हो रही है. वहीं जिले के सीमावर्ती क्षेत्र ओड़िशा में सरकार महुआ शराब दुकानों में बेच रही है, ओड़िशा राज्य में बेचे जानी वाली जेब्रा और चिड़ी छाप महुआ शराब का नाम छत्तीसगढ़ में प्रशिद्ध है.

यदि शासन चाहे तो महुआ शराब से भी अपना राजस्व बढ़ा सकती है, हलाकि कई लोग चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह से शराब बंदी कर दे लेकिन इस शराब बंदी से अवैध कारोबार कई गुना बढ़ जायेगा, जो लोगों के स्वास्थ्य और राज्य के राजस्व के लिए हानिकारक हैं.

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