बसना : नीलांचल सेवा समिति का नव वर्ष एवं पौष पुन्नी मिलन समारोह, कांग्रेस के 50 सदस्यों ने ली नीलांचल की सदस्यता, श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 16 से.
नगर स्थित मंगल भवन में नीलांचल सेवा समिति के द्वारा नव वर्ष एवं पौष पुन्नी मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य समारोह में नीलांचल सेवा समिति के सभी 18 सेक्टरों के पदाधिकारीगण, सदस्यगण, जनप्रतिनिधिगण एवं समाज प्रमुख पदाधिकारीगण शामिल हुए।
इस भव्य कार्यक्रम के दौरान नीलांचल सेवा समिति के संस्थापक डॉ.सम्पत अग्रवाल के जनसेवा कार्यो से प्रभावित होकर छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव सचिन रोहिल्ला (सन्नी) ने 15 प्रमुख पदाधिकारियों सहित 50 सदस्यों के साथ नीलांचल सेवा समिति की सदस्यता ली, डॉ.सम्पत अग्रवाल ने पुष्पहार, शाल श्रीफल से स्वागत कर नीलांचल सेवा समिति की सदस्यता प्रमाण पत्र एवं परिचय पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
पौष पुन्नी छेरछेरा पर्व का महत्व बताते हुए डॉ. सम्पत अग्रवाल ने समस्त क्षेत्रवासियों को उपहार भेंट कर पौष पुन्नी छेरछेरा पर्व की बधाई व शुभकामनाएं दी और कहा कि यह पौष पुन्नी छेरछेरा पर्व दान लेने और देने का त्यौहार है। दान देने से मन में उदारता आती है और दान लेने से व्यक्ति के अंदर अहंकार खत्म हो जाता है।
डॉ. सम्पत अग्रवाल ने बताया कि हमारे छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आ जाने के बाद मनाया जाता है। इस दौरान लोग घर-घर जाकर लोग अन्न का दान माँगते हैं। हमारी लोक परंपरा के अनुसार पौष महीने की पुन्नी (पूर्णिमा) को प्रतिवर्ष छेरछेरा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियाँ हाथ में थैला, बोरी आदि लेकर घर-घर छेरछेरा माँगते हैं। इस दिन सभी घरों में बडा,भजिया, पूरी, आलू चाप,अइरसा रोटी (छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध व्यंजन) तथा अन्य व्यंजन बनाया जाता है। इस दिन अन्नपूर्णा देवी की पूजा की जाती है। पर्व के दिन द्वार-द्वार पर 'छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा' 'अरन बरन कोदो दरन,जभे देबे तभे टरन' की गूँज सुनाई देती है। पौष पूर्णिमा के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व के लिए लोगों में काफी उत्साह होता है। गौरतलब है कि इस पर्व में अन्न दान की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। यह उत्सव कृषि प्रधान संस्कृति में दानशीलता की परंपरा को याद दिलाता है। उत्सवधर्मिता से जुड़ा छत्तीसगढ़ का मानस लोकपर्व के माध्यम से सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए आदिकाल से संकल्पित रहा है।
16 जनवरी से 24 जनवरी तक नगर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
उन्होंने आगे सर्व समाज श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति एवं बसना विधानसभा क्षेत्रवासियों द्वारा 16 जनवरी से 24 जनवरी तक नगर स्थित दशहरा मैदान ( पदमपुर रोड) में आयोजित किये जा रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के बारे में बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनने वाले का लोक परलोक एवं सभी के पुर्वजों को शांति की प्राप्ति होती है, कथा सुनने से भविष्य में सारी मनोकामना पूरी होती है, मैं पुरे बसना विधानसभा क्षेत्रवासी को अपना परिवार मानता हूँ। इस भव्य आयोजन में हमारी 25000 बहनें कलश धारण करेंगी,यह भव्य आयोजन आप सभी के सहयोग से संभव है। जहाँ भी मेरा सम्मान होता सब आप लोगो को समर्पित है, इस श्रीमद्भागवत कथा आयोजन से नर सेवा नारायण सेवा करने का ज्ञान मिलता है,आज हमारे नीलांचल सेवा समिति में लगभग 2 लाख सदस्य है, जिसमें हमारी 80 हजार बहनों की मजबूत टीम है।