1 साल की बच्ची को टीका लगवाना पड़ा महंगा.
पिथौरा शासकीय अस्पताल
में 1 वर्ष की बच्ची को टीका लगने के बाद अब उसका हाथ काम करना बंद कर दिया है. जिसे
लेकर बच्ची के पिता ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर और जिला
चिकित्सा अधिकारी से मामले की जाँच कर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की है. जिस पर
स्वास्थ विभाग की ओर से भी जाँच का भरोषा दिलाया गया है.
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम राजा सेवैया खुर्द के निवासी रवि शंकर पाढ़ी 25 मई 2018 को अपनी 1 वर्ष की बेटी आभा पाढ़ी को पिथौरा के शासकीय अस्पताल में मिजल्स का टीका लगवाने ले गए थे. जिसके बाद बच्ची के दाहिने हाथ में सूजन आ गई और वह अंदर ही अंदर पक गया.
इसके चलते बच्ची सीरियस होकर
कोमा में चली गई और उसे दिनांक 18 जून 2018 को रायपुर स्थित बाल गोपाल हॉस्पिटल
में भर्ती कराना पड़ा. जहां वेंटिलेटर में रखकर उसके दाहिने हाथ से ऑपरेशन कर मवाद
निकाला गया. वर्त्तमान में बच्ची की हालत ऐसी हो गई है कि दाहिने हाथ जिसमें टीका
लगा था वह काम नहीं कर रहा है. बच्ची का इलाज अभी भी चालू है.
वहीं बच्ची के पिता अब इस
मामले में जांच कर दोषियों पर तत्काल कार्यवाही चाहते है और बच्ची के शारीरिक नुकसान
के लिए शासकीय अस्पताल पिथौरा को जिम्मेदार मानते है. उनका कहना है कि वे गरीब
परिवार से है और पेशे से वाहन चालक है और इस लापरवाही के कारण उन्हें लाखों रुपए
का नुकसान हुआ है और मानसिक रूप और शारीरिक रूप से पिछले 3 महीनों से परेशान है. और
चाहते है कि उचित स्थान पर बच्ची का इलाज करवा कर उसका हाथ ठीक किया जाए.
आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा देश में रूबेला से बच्चों की हो रही
मौतों के बाद देशभर के बच्चों को मिजल्स का टीका टीका लगवाया जा रहा है. यह टीका 9
माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को लगाया जा रहा है. रूबेला के चलते बच्चे के शरीर
में छोटे-छोटे दानें निकल आते हैं. सेंदरी माता की तरह इसकी शुरूआत होती है. इसकी
वजह सर्दी, खांसी, बुखार आता है. निमोनिया
हो जाता है, मस्तिष्क ज्वर होने का खतरा होता है.
टीकाकरण के चलते यदि
बच्ची से कोई लापरवाही स्वास्थ विभाग द्वारा बरती गयी है तो जल्द ही जांच कर इस पर
कार्यवाही करनी चाहिए. 