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महासमुंद : ओबीसी मोर्चा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद चंदूलाल साहू ने आपातकाल को याद करते हुए कहा "काली रात दर्द, आज भी नहीं भूले हम"

ओबीसी मोर्चा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवम पूर्व सांसद चंदूलाल साहू ने आपातकाल को याद करते हुए कहा "काली रात दर्द, आज भी नहीं भूले हम" 25 जून 1975 की आधी रात जब भारतीय लोकतंत्र को भरी जवानी में इमरजेंसी की चाक से खत्म किसी शासक या जनरल ने नही की बल्कि भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने हाथों से की। 1971 में बांग्लादेश बनाकर शोहरत के शिखर पर पहुंची इंदिरा को अपने खिलाफ़ उठा हर आवाज़ साजिश लग रही थी।

मीडिया पर सेंसर शिप -
सरकार विरोधी लेखों के कारण कई पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया उस समय के ये पत्रकार रतन मलकानी, कुलदीप नैय्यर, दीनानाथ मिश्रा, विरेंद्र कपूर विक्रम राव सहित लगभग 50 से अधिक पत्रकार को नौकरी से निकाल दिया गया।

जमकर हुई दादागिरी -तत्कालीन सूचना एवम प्रसारण मंत्री जिसके नाम से मीडिया कांपती थी इन्होंने ने कहा था अब पुरानी आजादी नहीं मिलने वाली है। फिल्म इंडस्ट्रीज में खौफ -फिल्मी गीतकारों को इंदिरा एवम सरकार की प्रशंसा में गीत लिखने एवम फिल्म बनाने के लिए बाध्य किया गया। किशोर कुमार के मना करने पर उसे बहुत परेशान किया, आयकर विभाग का छापा डलवाया, रेडियो से उनके गाने का प्रसारण बन्द कर दिया, अन्त में किशोर कुमार ने हार मान ली। किस्सा कुर्सी का एवम आंधी का सारे प्रिंट जला दिए गए।

नसबंदी - संजय गांधी ने नसबंदी अभियान चलाया शहर से लेकर गांव गांव तक महिलाओं पुरुषों यहां तक की अविवाहित नवयुवकों को भी ट्रेनों से बसों से पकड़कर जबरन नसबंदी करवा दिया गया।
आपातकाल में मीसा कानून - मेंटनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत एक लाख दस हजार आठ सौ छः लोगों को मीसा बंदी बनाया गया।
स्वय सेवक संघ का पूर्ण दमन - सबसे ज्यादा स्वयं सेवक, प्रचारक और कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए 90% लोग किसी न किसी तरह से संघ से जुड़े रहे।
इस कानून में अदालत में पेश किए गए या जमानत का प्रावधान नहीं था और न ही बंदी बनाने का कारण बताया जाता था।
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने लॉ कॉलेज में दो कमरों पर संघ का कार्यालय खोला गया था जिस पर बुलडोजर चला कर तोड़ दिया गया।

विपक्ष की आवाज़ बंद - आपातकाल की घोषणा होते ही CPI को छोड़कर सभी विपक्षी दलों के नेताओं को जेल में ठूंस दिया गया जिसमें जय प्रकाश नारायण, विजियाराजे सिंधिया, राजनारायण, मोरार जी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, जार्ज फर्नांडिस, मधु लिम्से, बाला साहब देवरस सहित विधायक सांसद आदि रहे।

पुलिस बनी खलनायक - पूरे देश में इंदिरा विरोधी विचार रखने वालों बीमार, बुजुर्ग महिला, बच्चे सभी तत्काल जेल भेज यातनाएं दी गई। इमरजेंसी तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली ने लगाया था जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश माननीय श्री जगमोहन ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध ठहराया था। इसलिए 25 जून को इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय या आपातकाल कहा जाता है।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर


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