बसना विधानसभा में डॉ. संपत के नाम की गूंज... नहीं आ रहा भाजप... - CG Sandesh

बसना विधानसभा में डॉ. संपत के नाम की गूंज... नहीं आ रहा भाजपा पदाधिकारियों को रास....

जैसे-जैसे चुनाव नसदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे भाजपा से टिकट पाने वाले दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है. दीवारों पर नये-नये नाम सामने आ रहे हैं. अपनी लोकप्रियता बढ़ाने अपने-अपने  स्तर पर ऑनलाइन पोल सर्वें अभियान कराये जा रहे हैं. इन सर्वे में जो नाम निकलकर सामने आ रहे हैं उसमे से डॉ. एन.के. अग्रवाल, डॉ. संपत अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी, पुरंदर मिश्रा के नाम चर्चित हैं जो लगभग सभी सर्वे अभियान में सामने आ रहे हैं. हलाकि सर्वे कोई भी हो सबसे आगे नाम डॉ. संपत अग्रवाल का ही दिखाई देता हैं.

इसके अलावा भी कई कार्यकर्ता टिकट को लेकर अपनी दावेदरी दिखाते नजर आ रहे हैं, बसना विधानसभा से बीजेपी में एक नया नाम देखने को मिल रहा है, गाँव-गाँव बीजेपी के चिन्ह के साथ मिलु भैया का नाम दीवार पर दिखाई दे रहा है. जिसे देखकर लगता है कि मिलु भैया बसना विधानसभा से टिकट लेने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन मिलु भैया के लगे विज्ञापन के बारें में ग्रामीणों से पूछो तो उन्हें पहचाने से ही इनकार कर देते हैं. मिलु भैया के बारें में पूछो तो लगता है कि बीजेपी अगर मिलु भैया को टिकट देदे तो बीजेपी का इस बार भी वही हाल होगा जो पिछली विधानसभा में डी.सी पटेल का हुआ था.

यह दीवार लेखन का कार्य यदि बीजेपी अपने पार्टी के पैसे से करा रही है तो उसके बदले संपत के नाम का लेखन उन्हें कहीं ज्यादा फायदा पहुंचा सकता था. ऐसा इसलिए क्योकि इस बार बसना विधानसभा में कड़ा मुकाबला बीजेपी VS कांग्रेस नही डॉ. संपत VS कांग्रेस होता नजर आ रहा है. यदि बीजेपी संपत के अलावा किसी दुसरे को टिकट देती है बीजेपी इस बार 30 हजार से भी कम वोट पर सिमट जाएगी. शायद संपत नाम ही बीजेपी को बसना विधानसभा से जीत दिला सकती है, जबकि अधिकतर लोग प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी चाहते हैं.

बावजूद इसके कई स्थानीय बीजेपी नेताओं को यह लगता है कि संपत अग्रवाल को टिकट मिल पाना मुश्किल है. बागी होकर चुनाव लड़ने की वजह से इस बार भी उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा. जबकि ठीक इसके विपरीत बसना विधानसभा के कोने-कोने से संपत अग्रवाल के गूंज की आवाज सुनाई देती है. कई लोग संपत अग्रवाल को बीजेपी से टिकट दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

बसना विधानसभा के गाँव-गाँव में संपत अग्रवाल का नाम मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी अधिक प्रशिध हो चूका है, जिन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक का नाम नहीं पता वे भी संपत अग्रवाल के नाम को जानते हैं. वहीँ संपत अग्रवाल की इतनी लोकप्रियता स्थानीय भाजपा नेताओं के गले रास नहीं आ रहा है. देखकर भी उसे अनदेखा करते नजर आ रहे हैं. संपत अग्रवाल को भाजपा के स्थानीय कार्यक्रम की जानकारी ना देकर उन्हें दूर रखा जा रहा है. ऐसा करते हुए ये नेता राजनीति में अपने निम्न स्तर की राजनीति को दर्शा रहे हैं. जबकि संगठन ने संपत अग्रवाल की बीजेपी में घर वापसी कराई है.

ये स्थानीय नेता जमीनी हकीकत से कोषों दूर हैं, जहाँ संपत अग्रवाल हार के बाद भी चार वर्षों तक लगातार ग्रामीणों ने जनसंपर्क बनाये रखे, तो वहीँ बीजेपी का हारा हुआ प्रत्याशी बोरिया बिस्तर समेट कर विधानसभा से चलता बना. जिसका नतीजा यह है कि आज विधानसभा के कोने-कोने से संपत अग्रवाल के समर्थन में आवाज आती सुनाई दे रही है. जिसे वीडियो में देखकर स्थानीय बीजेपी नेता प्रायोजित वीडियो बताते हैं. आखिर क्यों ये संपत की गूंज को नजर अंदाज कर रहे हैं ? क्या ये बसना विधानसभा में दुबारा कांग्रेस के विधायक को स्थापित करना चाहते हैं ?


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