महासमुंद : कलेक्टर ने ली मितानिनों की बैठक
प्रारम्भिक स्तर पर बीमारियों के रोकथाम में मितानिनों की महत्वपूर्ण भूमिका
गम्भीर कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने में प्राथमिकता से कार्य करें
प्रत्येक बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित हो
महासमुंद : कलेक्टर प्रभात मलिक ने जिला पंचायत के सभाकक्ष में मितानिनों की बैठक लेकर उन्हंे आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर परिणाम के लिए पहली कड़ी मितानिन है। पारा या मोहल्ले में पहली चिकित्सक मितानिन ही है। अतः बीमारियों के प्रारम्भिक स्तर पर रोकथाम में मितानिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि सभी मितानिन सेवा और समर्पण भाव से कार्य करें। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने महीने में एक बार उप स्वास्थ्य केन्द्रों में आशा और एएनएम की मीटिंग, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मेडिकल ऑफिसर के साथ मितानिन ट्रेनर्स की मीटिंग एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में खण्ड चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक करने निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जो मितानिन वर्तमान में कार्यरत् नहीं हैं, उन्हें हटाने हेतु प्रस्ताव तैयार करें। कलेक्टर मलिक ने कहा कि दावा प्रपत्र अनुसार प्रथम त्रैमास में जांच बढ़ाएं। 5 अगस्त से जो गर्भवती महिलाएं प्रथम त्रैमास में पंजीकृत नहीं हुई है, संबंधित एमटी और आशा के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें। 15 अगस्त के बाद अगर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अंतर्गत आने वाली महिलाएं बिना चिन्हांकन के मिली तो एमटी एवं संबंधित कर्मचारियों पर कार्यवाही करें। गंभीर कुपोषित बच्चों को मध्यम श्रेणी में एवं मध्यम श्रेणी के बच्चों को सुपोषित की ओर लाने का भरपूर प्रयास करें एवं सूची भी तैयार करें।
कलेक्टर ने आगामी दो माह में 90 प्रतिशत बच्चों को मध्यम से सुपोषित में लाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने प्रत्येक मितानिन ट्रेनर्स को पोषण पुनर्वास केन्द्र में रोस्टर के अनुसार बच्चे भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने मोतियाबिंद मरीजों की ग्रामवार लाइन लिस्ट 30 अगस्त की स्थिति में तैयार करने निर्देश दिए। खण्ड चिकित्सा अधिकारी के द्वारा 5 बीमारियों एनसीडी वाले चिन्हांकित करके आशा प्रशिक्षकों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए है। सितम्बर माह की स्थिति में एएनएम द्वारा 10 प्रकरण सत्यापित किया जाएगा। सभी वर्ग बालक, बालिका एवं महिलाओं में एनीमिया प्रकरणों की पंक्तिबद्ध सूची तैयार करने कहा गया है।
उन्होंने कहा कि हर आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों का वजन नियमित रूप से हो। साथ ही सुनिश्चित करें कि बच्चों का वनज बढ़े। बच्चों का टीकाकरण पूर्ण होना चाहिए। टीकाकरण होने पर घर के बाहर जानकारी चश्पा करें। टीकाकरण के लिए एक भी बच्चा छूटने न पाए। साथ ही कहा कि मितानिनों के पास दवा पेटी और पर्याप्त मात्रा में दवाई उपलब्ध हो। किसी भी मोहल्ले या पारा मेें यदि संक्रामक बीमारी के संबंध में जानकारी मिलती है उसे तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में रेफर करें। ज्ञात है कि जिले में 2238 मितानिन कार्यरत् है। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. कुदेशिया, खण्ड चिकित्सा अधिकारी, एनएएम एवं मितानिन प्रशिक्षक मौजूद थे।