बसना विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी हेतु कौन है प्रबल दावेदार, क्या इन तीन नामों पर हो रही चर्चा ?
छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली सूचि जारी कर दी है. संभावना जताई जा रही है की जल्द ही बीजेपी की दूसरी सूचि जारी हो सकती है. लेकिन बसना क्षेत्र के लोगों की माने तो दूसरी सूचि में भी भारतीय जनता पार्टी बसना विधानसभा से अपना प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी.
सूचि जारी होने के पहले टिकट को लेकर तमाम अटकले लगाये जा रहे हैं, इस समय क्षेत्र से कई बीजेपी नेता टिकट मिलने को लेकर अपने-अपने दावे कर ढिंढोरा पिट रहे हैं. लेकिन क्षेत्र में जिन तीन नामों पर जोर-शोरों से चर्चा हो रही है वह नाम संपत अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी और पुरंदर मिश्रा हैं. कुछ समय पहले वायरल हो रहे सूचि में भी इन तीन नामों से प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा है.
छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर द्वारा कराये जा रहे सर्वे में भी इन्ही तीन नेताओं के नाम शामिल है, लेकिन सवाल यह है कि इन तीनों नेताओं में कौन प्रबल दावेदार है जो बीजेपी को जीत दिला सकता है. यदि लोग बीजेपी के घोषणा पत्र पर विशवास करने से कतरा रहे हैं तो क्या कोई ऐसा चेहरा हो सकता है जो घोषणा पत्र पर भारी पड़े और पार्टी को जीत दिला सके.
विशेषज्ञों की माने तो इस बार चुनावी घोषणा पत्र में भी कांटे की टक्कर रहेगी, चुनाव जीतने कई तरह की घोषणाएँ की जाएगी, फिर से कर्ज माफी की आस में कई किसान कर्ज भी ले रहे हैं. ऐसे में कोई चेहरा ही काम आ सकता है जिसके नाम पर वोट पड़े. क्योंकि पिछली बार रमन के नाम पर डी.सी पटेल को 35 हजार वोट ही मिल पाए थे और उन्हें तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था. इसलिए बीजेपी जीतने वाले प्रत्याशी पर ही अपना दाव लगाना चाहेगी. और ये ही वे तीन चेहरे हैं जो शायद बीजेपी को जीत दिलवा सकती है.
अगर दैनिक भास्कर सर्वे की बात करें तो भाजपा के उम्मीदवारों में संपत अग्रवाल 73 प्रतिशत लोगों की पसंद है, यह जो 73 प्रतिशत का आंकड़ा है वह कांग्रेस और बीजेपी के बाकि उम्मीदवारों के पसंद का आंकड़ा को जोड़ लिया जाए तो भी उससे अधिक है. 73 प्रतिशत आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि संपत अग्रवाल की चर्चा विधानसभा में चारों ओर हैं. ये वो चेहरा है जिसे बीजेपी अपना प्रत्याशी बनाये तो आसानी से जीत हासिल कर सकती है. लेकिन इन्हें प्रत्याशी बनाये जाने से कुछ स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता नाराज हो सकते हैं.
दूसरा जो नाम है वह पूर्व विधायक रूपकुमारी चौधरी का है, भाजपा के पसंदीदा उम्मीदवारों में इन्हें 21 प्रतिशत वोट मिले हैं, वर्त्तमान विधायक से इनकी लोकप्रियता कहीं अधिक दिखाई दे रही है, बीजेपी रूपकुमारी को भी अपना चेहरा बना सकती है, ऐसा माना जा रहा है रूपकुमारी को प्रत्याशी बनाने से क्षेत्र में कोलता, अघरिया और आदिवासी वोट भी आसानी से बीजेपी को मिल जायेंगे, रूपकुमारी चौधरी सीधे मुकाबले में भी पहले राजा देवेद्र बहादुर को मात दे चुकी है, लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती संपत अग्रवाल हैं, संपत अग्रवाल को यदि पार्टी नजरअंदाज करती है तो कहीं ना कहीं इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा. वर्त्तमान में संपत अग्रवाल निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात तो नही कह रहे हैं, लेकिन उनके समर्थकों को संपत का निर्दलीय चुनाव जीतना भी बड़ा आसान नजर आ रहा है. अगर समर्थकों के दबाव में आकर संपत अग्रवाल एक बार फिर बगावत करते हैं तो..... कहना मुश्किल है कुछ भी हो सकता है.
पुरंदर मिश्रा की बात करें तो बीजेपी में पिछले 20 साल से टिकट के लिए इंतज़ार कर रहे हैं, जिसके चलते इनके नाम पर भी पार्टी विचार कर सकती है. भास्कर सर्वे में इन्हें मात्र 6 प्रतिशत वोट ही मिले हैं, पूर्व में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके है. वर्त्तमान में टिकट मिलने पर बीजेपी में एक जुटता ही इन्हें जीत दिला सकती है, जो कि मुश्किल नजर आता है.