बसना : अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम खाली हाथ लौटी, खूब हुई नोक-झोंक, नगर पंचायत अध्यक्ष ने भी किया अतिक्रमण हटाने का विरोध.
बसना नगर के पदमपुर रोड में अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम को आज बिना अतिक्रमण हटाये वापस जाना पड़ा. अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व टीम के विरोध में नगर पंचायत अध्यक्ष सहित कई लोग एकत्रित हो गए, प्रशासन और नागरिकों के बीच जमकर नोक-झोंक हुई और अंत में प्रशासन को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा. इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष गजेन्द्र साहू भी प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित दिखे उन्होंने प्रशासन पर शिकायत के बावजूद कार्यवाही ना करने के आरोप भी लगाये.
नगर पंचायत अध्यक्ष गजेन्द्र साहू ने अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम से कहा कि यहाँ इनकी दुकानों से नगर में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो रही है, जहाँ पुरे नगरवासियों को परेशानी हो रही है उस बाजार पड़ाव में अतिक्रमण हटाने आज तक क्यों प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रही है.
वहीँ अतिक्रमण हटाने के लिए जारी लिए आदेश में जिनका नाम है वहां ये विगत 30 वर्षों से भी अधिक समय से काबिज हैं, उनकी दुकाने हैं इसी से इनकी रोजी रोटी चलती है. यह अतिक्रमण हटाने जिसने शिकायत की है उनके नवनिर्मित भवन के सामने ये कुछ दुकाने आ रही है. अगर ऐसा है तो अतिक्रमण करने वालों के दुकान हटने चाहिए, लेकिन अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम को यह कब्ज़ा हटाने से आज पीछे हटाना पड़ा, क्योंकि शासकीय भूमि पर काबिज इन व्यवसायियों ने नवनिर्मित भवन को भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर बनाये जाने का आरोप लगाया. और उससे भी ज्यादा आरोप अधिकारीयों पर शासकीय जमीन के नाम पर धांधली करने के लगे.
इनका कहना है कि यह नवनिर्मित भवन शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना कर बनाया गया, जिसकी पूर्ण रूप से जाँच होनी चाहिए, जहाँ भवन निर्मित किया गया है उसे गलत ढंग से कृषि भूमि बताकर ऐसा किया गया है. आरोप लगाया गया कि ऐसा करने वाले पूर्व में पदस्थ तहसीलदार और पटवारी मिलीभगत से ये सब हुआ है.
16 अक्टूबर 2020 को अनुविभागीय अधिकारी सरायपाली ने तहसील कार्यालय का फर्जी सील और किसान किताब में फर्जीवाड़ा को लेकर एक बड़ा खुलाशा किया था. जिसमे जाँच के दौरान पटवारी के यहाँ से तहसील कार्यालय का फर्जी सील के साथ किसान किताब बरामद किया गया था. जांच में पटवारी द्वारा सील एक निजी दूकान में बनाये जाने की बात सामने आई थी.
अब आरोप लग रहे हैं कि उसी समय फर्जी सील और कूटरचना तरीके से दस्तावेज़ का प्रयोग कर शासकीय भूमि को निजी कर दिया गया. इसलिए अब ये अतिक्रमणकर्ता यहाँ से हटने को तैयार नहीं है, ये चाहते हैं अगर अतिक्रमण हटना है तो सभी का हटे.
वहीँ राजस्व अधिकारीयों ने विरोध कर रहे लोगों से आवदेन लिखकर देने को कहा और उन्हें बिना अतिक्रमण हटाये जाँच का आश्वाशन देना पड़ा. अधिकारीयों को अतिक्रमण हटाये जाने पर बसना नगर को अनिश्चितकालीन बंद करने की चेतावनी तक दे दी गई.