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महासमुंद : स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय में त्रिदिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन विद्यार्थियों ने सीखा मंडला आर्ट

जीवन के तनाव और व्यग्रता को दूर करती है कला : डॉ. अनुसुइया

आत्मिक शांति प्राप्त करने का एकमात्र उपाय है- कला : डॉ. अनुसुइया

स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद के त्रिदिवसीय कार्यशाला का समापन समारोह संपन्न

22 सितंबर को स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय महासमुंद के सभा कक्ष में संस्था प्रमुख प्राचार्य महोदया प्रो. (डॉ.) अनुसुइया अग्रवाल (डी. लिट.) के मार्गदर्शन में कौशल विकास के त्रिदिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिवस आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आरंग में पदस्थ शिक्षक श्री दीपक दुबे में अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की. कार्यक्रम की अगुवाई महाविद्यालय के नोडल अधिकारी अजय राजा ने की.

अंतिम दिवस के कार्यक्रम में महाविद्यालय की कला, वाणिज्य तथा विज्ञान संकाय के सभी छात्र-छात्राओं ने तीन दिनों से एमडीएफ बोर्ड के ऊपर चल रहे अपने कार्य को अंतिम रूप दिया. साथ ही अपने बने हुए क्राफ्ट वर्क की लघु प्रदर्शनी भी लगाई . समापन समारोह में उपस्थित शिक्षक दुबे ने अपने प्रेरणादाई उद्बोधन से विद्यार्थियों में जीवन में सफल होने हेतु एक नए जोश और संकल्प की भावना जगाई. नोडल अधिकारी प्रोफेसर अजय राजा ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके चहुमुखी विकास हेतु इस तरह की शैक्षणेत्तर गतिविधियां भी लगातार आयोजित की जाती रहेगीं. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि प्रशिक्षण में सीखे सभी कलाओं को प्रैक्टिस करते हुए आगे बढ़ाएं.

प्राचार्य महोदया ने अपने उद्बोधन में जीवन में कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि वर्तमान आधुनिक समय के आपा-धापी तथा गला काट प्रतिस्पर्धा में डटे रहने के लिए हमें मानसिक रूप से सशक्त होने में मदद होने की जरूरत है. हम निराशा, हताशा और अवसाद जैसे ऋणात्मक विचारों को दूर करने के लिए धनात्मक मानसिक तरंगों उत्पन्न कर ही हम अपने आप को बचा सकते हैं. उन्होंने तीन मूर्ति कारों की कहानी का जिक्र करते हुए बताया कि पूरी तन्मयता और रुचि से किया गया कार्य अन्य की तुलना में उत्कृष्ट होता है. हमें अपने जीवन के प्रत्येक कार्य को कलात्मक रूप से करते हुए उसका रसास्वादन करना चाहिए.

अंतिम दिवस में त्रिदिवसीय कार्यशाला की प्रशिक्षिका श्रीमती निधि अग्रवाल ने मंडला आर्ट की प्रकिया विद्यार्थियों को सिखाई . उन्होंने बताया कि मंडला डिजाइन दरअसल ब्रह्माण्ड‍ को दर्शाता है जिस तरह ब्रह्माण्ड‍ अपने में सभी चीजों को समा लेता है, उसी तरह मंडला में लाइन्स केंद्र में समाती दिखती हैं। उन्होंने बताया कि मंडला आर्ट बनाते समय बारीक पैटर्न को समरूपता में बनाया जाता है. इस कला में क्लै आर्ट के ग्राफिक और आकर्षक ज्यामितीय पैटर्न एम डी एफ बोर्ड पर सजाए जाते हैं. उन्होंने कागज पर बनने वाले मंडल पेंटिंग को मड एंड मिरर वर्क के साथ मिलाकर एक अनूठा अद्वितीय कला प्रस्तुत की.

यह रंगीन कांच, पत्थर या अन्य सामग्रियों के छोटे टुकड़ों के संयोजन से क्लै एवम् पेंट आर्ट बनाने की कला है. उन्होंने बताया कि मंडला एक डिजाइन है जिसमें एक केंद्रीय बिंदु से सममित रूप से डिज़ाइन बने होते हैं। प्रकृति में भी मंडला आसानी से मिल जाएंगे। फूल, पेड़ के छल्ले, सूरज, बर्फ के टुकड़े, मकड़ी के जाले,, बीज, फल, इत्यादि ये सभी प्राकृतिक मंडला आर्ट हैं।

उन्होंने अपनी त्रिदिवसीय कार्यशाला में बताया कि कला का उपयोग कला चिकित्सा के रूप में किया जा रहा है। कला चिकित्सा में मंडलों के उपयोग से रचनात्मक ऊर्जा का संचार करने और खुद को तनाव मुक्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि जब आप मंडल आर्ट बना रहे होते हैं तो उसकी बारीकियों के कारण पूरा ध्यान आर्ट में लगता है। इससे कॉर्टिसोल हॉर्मोन का स्तर कम होता है और तनाव दूर होता है। यह आर्ट तनाव और व्यग्रता दूर करने में सहायक है, नींद अच्छी आती है और फोकस करने की क्षमता बढ़ती है।

कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की बी.एससी प्रथम वर्ष की छात्रा अनन्या यादव तथा मानसी छत्री ने अपने अनुभव साझा किया उन्होंने बताया कि वे तीन दिनों में लिपन कला, मोजैक कला, क्ले एंड मड आर्ट, मिरर कला, मंडला कला जैसे कई कलाएँ सीखे. पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कार्यशाला आयोजन का उन्होंने सहृदय स्वागत किया. कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के गणित के व्याख्याता निलेश तिवारी ने किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. श्रुति झा (सहायक अध्यापक- अंग्रेजी), संतोष कुमार बंजारे, (सहायक प्राध्यापक- समाजशास्त्र), रवि देवांगन (सहायक प्राध्यापक -अर्थशास्त्र) तरुण कुमार बांधे ( सहायक प्राध्यापक- वाणिज्य), मुकेश कुमार सिन्हा (व्याख्याता - कंप्यूटर एप्लीकेशन), निलेश कुमार तिवारी (व्याख्याता- गणित), शिखा साहू ( व्याख्याता - भौतिक शास्त्र), माधुरी दीवान (व्याख्याता -वाणिज्य) चित्रेश बरेठ ( व्याख्याता- रसायन विज्ञान), केमिका चंद्राकर (व्याख्याता - कंप्यूटर विज्ञान ) आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु महाविद्यालय के कर्मचारी कौशल साहू ने सक्रिय भूमिका निभाई ।

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