बसना विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल, आज भी कई स्कू... - CG Sandesh

बसना विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल, आज भी कई स्कूलों में है शिक्षकों की कमी।

बसना विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था का हाल आज भी बुरी अवस्था में है। लगातार विगत 5 वर्षों से भी अधिक समय से विकासखंड अधिकारी के रूप में पैर जमाए अधिकारी भी इस लड़खड़ाती शिक्षा व्यवस्था को नही सम्हाल पा रहे हैं।

जहाँ से नैतिकता और अनुशासन की शिक्षा मिलती हो उसी विभाग के खिलाफ भ्रष्टाचार की खबरें लगने पर भी किसी तरह की कोई कार्यवाही देखने को नही मिलती। शायद विभाग अब अपने अधिकरियों को नैतिकता और अनुशासन का पाठ पढ़ाना छोड़ भ्रष्टाचार की शिक्षा देने में जुटा है। इसलिए विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था का ऐसा हाल है।

बसना विकासखंड मुख्यालय से दुरस्त क्षेत्रों में बसे कई स्कूलों में विगत कई वर्षों से शिक्षक की कमी देखने को मिल रही है। कहीं पूरी प्राथमिक शाला की जिम्मेदारी एक शिक्षक के भरोसे है, तो कहीं विषय पढ़ाने वाले शिक्षक ही उपलब्ध नही है। यह दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यालय के समीप कुछ ऐसे स्कूल हैं जहाँ जरूरत से अधिक शिक्षक हैं। जहाँ जरूरत नही वहाँ ये शो पीस बनकर पैर जमाए बैठे हैं। जिम्मेदार पद पर होते हुए भी इन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास नही है। ना इन्हें देश की चिंता है ना बच्चों के भविष्य की। शिक्षाकर्मी से संविलियन होने के बावजूद ग्रामीण स्तरों के शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार होता नजर नही आता।

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जो शिक्षकों की कमी दिखाई दे रही है इसका जिम्मेदार कौन है ? क्या विभाग को नही पता कहाँ-कहाँ उसके स्कूल हैं, और उनमें कितने शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए। बावजूद इसके कहीं जरूरत से अधिक शिक्षक तो कहीं शिक्षक को तरस रहा है विद्यालय।

ये शिक्षक अपनी मनमर्जी के मालिक हैं, आज हर शिक्षक मुख्यालय के समीप रहना चाहता है, दूरस्थ अंचलों में जाने से ये शिक्षक कतराते हैं। कहीं पैसे तो कहीं पहुंच दिखाकर मुख्यालय के समीप ही अपना तबादला कराते हैं। ऐसे में शिक्षा से वंचित रह जाते हैं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के बच्चे। जिन्हें पढ़ाने शिक्षकों की भर्ती तो सरकार करती है। ये शिक्षक उन बच्चों तक नही पहुंचते जहां उन्हें शिक्षा देनी होती है।

कई शिक्षक ऐसे भी देखने को मिलते हैं जो पूरी ईमानदारी से अपने अकेले के कंधों पर पूरा प्राथमिक या माध्यमिक शाला संचालित करते नजर आते हैं। लेकिन जो शिक्षक आदेश का पालन ना कर अपनी व्यवस्था में ना जाते हुए तबादले के जुगाड़ में जुट जाते हैं, वे सिस्टम और जनता के लिए बोझ बन जाते हैं।


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